वंदे मातरम् को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। AIMIM प्रमुख Asaduddin Owaisi ने इस गीत को लेकर अपनी टिप्पणी में कहा कि इसे राष्ट्रगान के बराबर नहीं माना जा सकता। उन्होंने इसे एक देवी की स्तुति बताया और कहा कि देश किसी एक धर्म या प्रतीक से नहीं चलता। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा शुरू हो गई। कई लोग उनके बयान का समर्थन कर रहे हैं, तो वहीं कई लोग इसे देश की भावना के खिलाफ बता रहे हैं।
BJP का तीखा पलटवार, तरुण चुग ने साधा निशाना
ओवैसी के बयान पर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव Tarun Chugh ने उनकी आलोचना करते हुए कहा कि जो लोग वंदे मातरम् का विरोध करते हैं, वे बौद्धिक रूप से ईमानदार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यह गीत पिछले 150 सालों से देशभक्ति का प्रतीक रहा है और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लाखों लोगों ने इसे गाते हुए बलिदान दिया। चुग ने यह भी कहा कि वंदे मातरम् का सम्मान करना सिर्फ एक नियम नहीं, बल्कि देश के लोगों की भावना है।
Vande Mataram is an ode to a goddess. It cannot be treated on par with the national anthem. Jana Gana Mana celebrates India and its people, not a particular religion. Religion ≠ nation. The man who wrote Vande Mataram was sympathetic to the British Raj and despised Muslims.…
— Asaduddin Owaisi (@asadowaisi) May 7, 2026
इतिहास और विचारों को लेकर अलग-अलग राय
इस पूरे विवाद में इतिहास और विचारधारा की अलग-अलग व्याख्याएं सामने आ रही हैं। ओवैसी ने अपने बयान में कहा कि वंदे मातरम् के रचयिता Bankim Chandra Chattopadhyay के विचारों को लेकर भी सवाल उठाए जाते रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि देश का संविधान सभी नागरिकों को बराबरी और स्वतंत्रता का अधिकार देता है, और किसी एक धार्मिक प्रतीक को राष्ट्र के साथ जोड़ना सही नहीं है। वहीं, भाजपा और कई अन्य लोग इसे स्वतंत्रता संग्राम की पहचान और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक मानते हैं।
#WATCH | Delhi | On AIMIM President Asaduddin Owaisi’s remarks on Vande Mataram, BJP National General Secretary Tarun Chugh says, “Vande Mataram is a declaration of the freedom fighters over 150 years… It was like a chant against the Britishers. Those who are against Vande… pic.twitter.com/WmbLJ6tKIF
— ANI (@ANI) May 8, 2026
बढ़ती बहस, आगे क्या होगा?
वंदे मातरम् को लेकर यह बहस नई नहीं है, लेकिन हर बार यह राजनीतिक माहौल को गर्म कर देती है। इस बार भी ऐसा ही देखने को मिल रहा है, जहां दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों के साथ सामने हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और बढ़ सकता है, खासकर जब अलग-अलग दल इस पर अपनी राजनीतिक रणनीति तय करेंगे। फिलहाल, यह साफ है कि वंदे मातरम् सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि एक ऐसा विषय है जो देश की राजनीति और भावनाओं से गहराई से जुड़ा हुआ है।
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