राजनीति में बयानबाजी का दौर एक बार फिर तेज हो गया है। पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने उत्तर प्रदेश की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पूर्व सांसद बृज भूषण शरण सिंह का जिक्र करते हुए शक्ति संतुलन पर सवाल खड़े किए। पप्पू यादव ने कहा कि योगी आदित्यनाथ अपने क्षेत्र में प्रभावशाली हो सकते हैं, लेकिन बृज भूषण शरण सिंह भी अपने इलाके में उतनी ही मजबूत पकड़ रखते हैं। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।
‘कौन किस पर निर्भर’ का सवाल
अपने बयान में पप्पू यादव ने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी में किसकी भूमिका कितनी मजबूत है, यह समझना जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि योगी आदित्यनाथ पार्टी की कृपा से आगे बढ़े हैं, जबकि बृज भूषण शरण सिंह का योगदान पार्टी के लिए अलग तरह से रहा है। पप्पू यादव के मुताबिक, जब योगी राजनीति में उतने सक्रिय नहीं थे, तब भी बृज भूषण शरण सिंह अपनी पहचान बना चुके थे। इस बयान के जरिए उन्होंने पार्टी के अंदर नेतृत्व और प्रभाव को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। साथ ही उन्होंने यह भी इशारा किया कि पुराने और अनुभवी नेताओं की अनदेखी करना सही नहीं माना जा सकता।
Delhi: Reacting to a statement by former BJP MP Brij Bhushan Sharan Singh, Purnia MP Pappu Yadav, says, “Brij Bhushan Singh has at times been close to Mulayam Singh Yadav and also to Union Home Minister Amit Shah. Now, if Yogi Adityanath is not giving him importance or respect,… pic.twitter.com/rG3XBAF3eu
— IANS (@ians_india) April 26, 2026
पुराने रिश्तों और बयान का संदर्भ
पप्पू यादव ने अपने बयान में यह भी कहा कि बृज भूषण शरण सिंह के संबंध कई बड़े नेताओं से रहे हैं, जिनमें मुलायम सिंह यादव और अमित शाह का नाम भी शामिल है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा समय में उन्हें वह सम्मान नहीं मिल रहा, जिसके वे हकदार हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब बृज भूषण शरण सिंह खुद भी अपने हालिया वक्तव्यों को लेकर चर्चा में हैं। पप्पू यादव के अनुसार, किसी भी वरिष्ठ नेता की उपेक्षा पार्टी के लिए नुकसानदेह हो सकती है और इससे कार्यकर्ताओं के बीच गलत संदेश जाता है।
बृज भूषण के बयान से जुड़ा विवाद
दरअसल, हाल ही में बृज भूषण शरण सिंह ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में ऐसा बयान दिया था, जिसने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया। उन्होंने कहा था कि अगर किसी को लगता है कि अब उनकी जरूरत नहीं है, तो उन्हें साफ बता दिया जाए, ताकि वे अपनी उपयोगिता खुद साबित कर सकें। यह बयान बिहार के एक कार्यक्रम के दौरान दिया गया था, जिसके बाद से चर्चा का दौर शुरू हो गया। अब पप्पू यादव के ताजा बयान ने इस मुद्दे को और हवा दे दी है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस पूरे मामले पर बीजेपी या अन्य नेताओं की क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।
