अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर समुद्री क्षेत्र तक पहुंच गया है। हाल ही में अमेरिकी सेना ने हिंद महासागर में एक ईरानी तेल टैंकर को जब्त कर लिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि यह टैंकर कथित तौर पर ईरानी कच्चे तेल की ढुलाई कर रहा था और उस पर पहले से ही प्रतिबंध लगे हुए थे। अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार, यह कार्रवाई समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत की गई है। इस घटना ने वैश्विक राजनीति और समुद्री व्यापार दोनों पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
तलाशी के अधिकार के तहत रोका गया जहाज
अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने जानकारी देते हुए बताया कि जिस जहाज को रोका गया है, उसका नाम ‘टिफानी’ है। अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में जहाजों की जांच करने के अधिकार के तहत की गई। प्रारंभिक रिपोर्ट्स के अनुसार, यह टैंकर भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच बंगाल की खाड़ी में पकड़ा गया। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह जहाज प्रतिबंधित नेटवर्क के तहत काम कर रहा था और ईरान को आर्थिक मदद पहुंचाने में शामिल हो सकता था। अब अमेरिकी सेना इस बात पर विचार कर रही है कि इस जहाज को आगे क्या किया जाए—इसे अमेरिका ले जाया जाए या किसी अन्य देश को सौंपा जाए।
ईरान से जुड़े जहाजों पर अमेरिका की सख्ती जारी
यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका ने इस तरह की कार्रवाई की हो। इससे पहले भी अमेरिकी नौसेना ने एक अन्य ईरानी कार्गो जहाज को रोककर जब्त किया था। उस समय अमेरिका का दावा था कि जहाज ने उसकी नाकाबंदी से बचने की कोशिश की थी। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि वे उन सभी जहाजों पर नजर रख रहे हैं, जिन पर हथियार, तेल या अन्य संसाधनों की आपूर्ति का संदेह होता है, जो ईरान को फायदा पहुंचा सकते हैं। अमेरिकी सेना की रणनीति साफ है कि वह ऐसे किसी भी नेटवर्क को तोड़ना चाहती है, जो उसके विरोधियों को समर्थन देता हो।
समुद्री सुरक्षा के नाम पर सख्ती
हिंद महासागर घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें एक बार फिर अमेरिका और ईरान के रिश्तों पर टिक गई हैं। इस तरह की घटनाएं वैश्विक व्यापार मार्गों और समुद्री सुरक्षा पर असर डाल सकती हैं। अमेरिका ने साफ किया है कि वह दुनिया के किसी भी हिस्से में जाकर प्रतिबंधित जहाजों पर कार्रवाई करेगा और अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए हर संभव कदम उठाएगा। वहीं, इस तरह की कार्रवाइयों से क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। फिलहाल यह मामला आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति का अहम मुद्दा बन सकता है।
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