महाराष्ट्र के नासिक में Tata Consultancy Services (TCS) से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जिसने कार्यस्थल की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कंपनी की एक महिला कर्मचारी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि ऑफिस के अंदर उसे लगातार मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। पीड़िता के अनुसार, कुछ सहकर्मी न केवल उसे अनुचित नामों से बुलाते थे, बल्कि उसके साथ छेड़छाड़ और अपमानजनक व्यवहार भी करते थे। इस मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी समेत कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है और अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है।
आपत्तिजनक हरकतों का आरोप
पीड़िता ने अपने बयान में बताया कि मार्च महीने में एक दिन जब वह साड़ी पहनकर ऑफिस पहुंची थी, तब एक आरोपी ने सार्वजनिक जगह पर उसका पल्लू खींच लिया। यह घटना ऑफिस की लॉबी में हुई, जिससे वह बेहद असहज और अपमानित महसूस करने लगी। महिला का कहना है कि उसने तुरंत खुद को संभाला, लेकिन आरोपी ने इस घटना के बाद भी अनुचित नजरों और व्यवहार से उसे परेशान करना जारी रखा। इसके अलावा, एक अन्य सहकर्मी पर आरोप है कि वह बार-बार उसके पास आकर बैठता था और जानबूझकर शारीरिक संपर्क बनाने की कोशिश करता था। पीड़िता के मुताबिक, यह सब बार-बार मना करने के बावजूद चलता रहा, जिससे उसकी मानसिक स्थिति पर भी असर पड़ा।
ऑनलाइन पीछा और आपत्तिजनक टिप्पणियां
मामला सिर्फ ऑफिस तक सीमित नहीं रहा। पीड़िता ने बताया कि जब उसने सहकर्मियों के व्यवहार का विरोध किया, तो उत्पीड़न का तरीका बदल गया। आरोप है कि एक कर्मचारी ने उसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फॉलो करना शुरू कर दिया और बार-बार संपर्क करने की कोशिश की। महिला ने उसे ब्लॉक कर दिया, लेकिन इसके बाद भी अलग-अलग माध्यमों से संदेश भेजे जाते रहे। पीड़िता का यह भी दावा है कि कुछ आरोपी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणियां करते थे और जब उसने इसका विरोध किया, तो उसे काम से जुड़े नुकसान की धमकी दी गई। यह पूरा घटनाक्रम न केवल व्यक्तिगत उत्पीड़न बल्कि कार्यस्थल के माहौल को भी असुरक्षित बनाता है।
कंपनी पर भी उठे सवाल
इस मामले में पुलिस ने तेजी दिखाते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। कई लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है और जांच जारी है। साथ ही, यह घटना बड़ी कंपनियों में कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में कंपनी को आंतरिक शिकायत समिति (ICC) के जरिए तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि पीड़ित को न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। फिलहाल, सभी की नजर इस केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर बनी हुई है, क्योंकि यह मामला कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक अहम उदाहरण बन सकता है।
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