अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी से बदलते हालात के बीच भारत और अमेरिका एक बार फिर व्यापारिक बातचीत की मेज पर आमने-सामने बैठने जा रहे हैं। 20 से 22 अप्रैल तक वॉशिंगटन में तीन दिवसीय ट्रेड टॉक का आयोजन किया जा रहा है, जिसे दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। इस वार्ता में भारत की ओर से मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन के नेतृत्व में 12 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल हिस्सा ले रहा है। अक्टूबर 2025 के बाद यह पहला मौका है जब दोनों देश सीधे आमने-सामने बातचीत कर रहे हैं। खास बात यह है कि यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता भी चल रही है, जिससे वैश्विक कूटनीतिक माहौल और ज्यादा संवेदनशील हो गया है।
टैरिफ विवाद के बाद नई शुरुआत
इस बार की बातचीत का मुख्य उद्देश्य प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के पहले चरण को अंतिम रूप देना है। फरवरी में टैरिफ विवाद के कारण मुख्य वार्ताकारों की बैठक टाल दी गई थी, लेकिन अब बदले हुए हालात में इसे फिर से शुरू किया जा रहा है। हाल ही में अमेरिकी अदालत के फैसले के बाद टैरिफ नीति में बदलाव आया है, जिसके तहत 150 दिनों के लिए 10% का अस्थायी टैरिफ लागू किया गया है। ऐसे में भारत अपने निर्यात हितों को सुरक्षित रखने और बेहतर शर्तों पर समझौता करने की कोशिश करेगा। पिछली बातचीत में भारतीय उत्पादों को कम टैरिफ का लाभ मिला था, जिससे निर्यातकों को बढ़त मिली थी। अब भारत उसी स्थिति को दोबारा हासिल करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
रियायतें, खरीद योजना और जांच
इस वार्ता में कई जटिल मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। पहले हुए समझौते के तहत भारत ने अमेरिका को कई रियायतें देने का संकेत दिया था, जिनमें औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर टैरिफ में कमी शामिल थी। साथ ही भारत ने आने वाले पांच वर्षों में अमेरिका से बड़े पैमाने पर सामान खरीदने की योजना भी जताई थी, जिसमें ऊर्जा, विमानन और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्र शामिल थे। हालांकि अब बदलते वैश्विक माहौल को देखते हुए इन प्रस्तावों की फिर से समीक्षा की जा सकती है। इसके अलावा अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि द्वारा धारा 301 के तहत चल रही जांच भी एक बड़ा मुद्दा बनी हुई है, जिसका भारत लगातार विरोध कर रहा है।
बदलता व्यापार समीकरण, चीन की बढ़ती भूमिका
इस पूरे घटनाक्रम के बीच वैश्विक व्यापार संतुलन में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनकर अमेरिका से आगे निकल गया है। हालांकि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार अब भी मजबूत बना हुआ है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि संतुलन में बदलाव आ रहा है। भारत का अमेरिका को निर्यात मामूली रूप से बढ़ा है, जबकि आयात में तेजी देखी गई है। इससे व्यापार अधिशेष भी घटा है। ऐसे में यह ट्रेड टॉक दोनों देशों के लिए बेहद अहम हो गई है, क्योंकि इसके जरिए न सिर्फ आर्थिक संबंध मजबूत होंगे, बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों में अपनी स्थिति भी तय होगी।
Read More-भारतीय जहाज पर हमले का सवाल और ट्रंप का गुस्सा! प्रेस कॉन्फ्रेंस में मचा हंगामा
