मध्य पूर्व में हालात तेजी से बदल रहे हैं और बड़े टकराव की आशंका बढ़ती जा रही है। Iran और United States के बीच इस्लामाबाद में हुई बातचीत के विफल होने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ संकेत दिया है कि अब कूटनीति से आगे बढ़कर सख्त कदम उठाए जाएंगे। इसी के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य में नाकेबंदी की तैयारी शुरू कर दी गई है, जिसे वैश्विक स्तर पर बेहद बड़ा और संवेदनशील कदम माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई तय समय के अनुसार लागू हो सकती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है।
नेतन्याहू का बड़ा बयान, सीजफायर पर खतरे के संकेत
इस बीच Benjamin Netanyahu ने भी सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि ईरान के खिलाफ संघर्ष अभी जारी है और किसी भी समय युद्धविराम खत्म हो सकता है। उन्होंने बताया कि इजरायली सेना सीमा क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम कर रही है और दुश्मन को पीछे धकेलने की कोशिश कर रही है। नेतन्याहू ने यह भी कहा कि जब तक उनके देश के नागरिक पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाते, तब तक सैन्य अभियान जारी रहेगा। उनके इस बयान ने यह साफ कर दिया है कि इजरायल भी इस पूरे घटनाक्रम में पूरी तरह सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
समुद्री रास्तों पर अमेरिका की नजर
Donald Trump के निर्देश के बाद अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज में निगरानी और नियंत्रण बढ़ा दिया है। जानकारी के मुताबिक, ऐसे जहाजों को रोका जा सकता है जो ईरान को शुल्क देकर इस रास्ते से गुजरने की कोशिश कर रहे हैं। यह कदम सीधे तौर पर ईरान की आर्थिक गतिविधियों पर असर डाल सकता है। वहीं Iran ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए चेतावनी दी है कि अगर उसके बंदरगाहों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई, तो पूरे क्षेत्र में कोई भी सुरक्षित नहीं रहेगा। इससे दोनों देशों के बीच टकराव की संभावना और बढ़ गई है।
वैश्विक संकट की आहट
होर्मुज दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में ऊर्जा आपूर्ति होती है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की नाकेबंदी या सैन्य टकराव का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है और वैश्विक बाजार अस्थिर हो सकते हैं। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या कूटनीतिक प्रयास इस संकट को टाल पाएंगे या यह तनाव एक बड़े युद्ध में बदल जाएगा।
