बारामती विधानसभा उपचुनाव के नामांकन वापसी के अंतिम दिन ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। महाराष्ट्र में बारामती सीट पर उपचुनाव को निर्विरोध कराने के लिए महायुति और पवार परिवार की पूरी ताकत लगी हुई है। सुनेत्रा पवार और उनके भतीजे रोहित पवार लगातार कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल से संपर्क में हैं। सूत्रों के अनुसार, सुनेत्रा पवार ने आज (9 अप्रैल) दोबारा फोन किया और रोहित पवार ने मुंबई में हर्षवर्धन सपकाल से मुलाकात कर आग्रह किया कि कांग्रेस उम्मीदवार आकाश मोरे अपना नाम वापस लें। यह राजनीतिक कवायद इस बात को लेकर है कि बारामती सीट सुनेत्रा पवार के पक्ष में निर्विरोध जीत सके।
रोहित पवार का रुख और रणनीति
अजित पवार के भतीजे रोहित पवार ने शुरू से ही स्पष्ट किया था कि उनका इरादा केवल सुनेत्रा पवार को निर्विरोध जीत दिलाने का है। उन्होंने एक्स पोस्ट पर लिखा कि बारामती का हर नागरिक, जो अजित पवार के लिए सम्मान रखता है, वही चाहता है कि उपचुनाव बिना मुकाबले संपन्न हो। रोहित पवार का कहना है कि अजित पवार का राजनीतिक जीवन कांग्रेस के करीब बीता है और उनके अच्छे संबंधों को देखते हुए कांग्रेस उम्मीदवार को अपना नाम वापस लेना चाहिए। उन्होंने हर्षवर्धन सपकाल से भी आग्रह किया कि वह इस मुद्दे पर वरिष्ठ नेताओं से चर्चा करें ताकि राजनीतिक माहौल को शांतिपूर्ण ढंग से नियंत्रित किया जा सके।
कांग्रेस का स्टैंड और अध्यक्ष का बड़ा कदम
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने इस मामले में जिम्मेदारी संभाली है। उनके पास प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उम्मीदवार के नाम वापसी का पूरा अधिकार है। हर्षवर्धन सपकाल ने रोहित पवार को स्पष्ट किया कि राजनीतिक निर्णय में संवेदनशीलता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन जरूरी है। हालांकि रोहित पवार ने हर्षवर्धन सपकाल के विचार और कांग्रेस नीति का सम्मान किया, लेकिन उन्होंने सभी उम्मीदवारों से आग्रह किया कि वे नाम वापसी करें और सुनेत्रा पवार की निर्विरोध जीत सुनिश्चित करने में मदद करें। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस अंतिम निर्णय से बारामती की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
अंतिम दिन का नाटकीय फैसला और संभावित परिणाम
आज नामांकन वापसी का आखिरी दिन है और सबकी निगाहें कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के फैसले पर टिकी हैं। यदि आकाश मोरे और अन्य उम्मीदवार अपने नाम वापस लेते हैं, तो सुनेत्रा पवार निर्विरोध जीत जाएंगी। इस कदम से न केवल पवार परिवार की राजनीतिक ताकत बढ़ेगी, बल्कि कांग्रेस के भीतर भी पार्टी एकजुट दिखाई देगी। इस उपचुनाव का परिणाम न केवल बारामती बल्कि महाराष्ट्र की राजनीतिक रणनीतियों को प्रभावित करेगा। निर्विरोध जीत का दाव भी राजनीतिक दबाव और दलगत समझौतों की परख साबित हो सकता है। इस समय सभी पार्टियों की निगाहें बारामती सीट पर टिकी हुई हैं।
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