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नालंदा के शीतला देवी मंदिर में भीड़ के कहर से 8 महिलाओं ने गवांई जान, मंत्री बोले- धैर्य रखें

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बिहार के नालंदा जिले के शीतला माता मंदिर में मंगलवार सुबह अचानक भगदड़ मचने से कम से कम 8 महिलाओं की मौत हो गई, जबकि कई अन्य श्रद्धालु घायल हुए हैं। स्थानीय लोगों और परिजनों ने बताया कि मंदिर में सुबह की पूजा और दर्शन के लिए भारी भीड़ जमा हो गई थी। घटना के समय अस्पतालों और मंदिर परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कई श्रद्धालु अस्पताल पहुंचने से पहले दम तोड़ गए, जबकि कुछ उपचार के दौरान जान गंवा बैठे। भीड़ इतनी ज्यादा थी कि स्थानीय प्रशासन और पुलिस के अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य में जुट गए। हादसे के कारणों का अभी तक स्पष्ट पता नहीं चल पाया है, लेकिन प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि अत्यधिक भीड़ और अनुचित नियंत्रण इस त्रासदी का मुख्य कारण रही।

प्रशासन और नेताओं की प्रतिक्रिया

इस हादसे के बाद बिहार सरकार और प्रशासनिक अधिकारी सक्रिय हो गए। जेडीयू नेता और मंत्री श्रवण कुमार ने मीडिया से बातचीत में मृतकों के परिजनों से धैर्य रखने की अपील की। उन्होंने कहा, “मृतक परिवारों को इस संकट की घड़ी में धैर्य रखना चाहिए। सरकार की तरफ से हर संभव सहायता दी जाएगी। यह घटना अत्यंत दुखद है।”

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ट्वीट कर कहा, “नालंदा जिले के शीतला देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की मृत्यु की घटना अत्यंत दुखद है। मृतकों के आश्रितों को आपदा प्रबंधन विभाग से 4-4 लाख रुपये और मुख्यमंत्री राहत कोष से 2-2 लाख रुपये अनुग्रह अनुदान देने के निर्देश दिए गए हैं। घायलों के समुचित इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करें।”

बिहार के गृहमंत्री सम्राट चौधरी ने भी कहा कि यह घटना अत्यंत पीड़ादायक है। उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई और कहा कि घायलों के लिए उचित उपचार और सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

मंदिर में भारी भीड़ और राहत कार्य

नालंदा के उप विकास आयुक्त (DDC) शुभम कुमार ने कहा कि यह हादसा मंदिर में अत्यधिक भीड़ के कारण हुआ। उन्होंने बताया कि भगदड़ में आठ श्रद्धालुओं की मौत हुई और पांच से अधिक लोग घायल हैं। अधिकारियों ने मंदिर के आसपास और अस्पतालों में सुरक्षा और राहत कार्य को तेज कर दिया।

स्थानीय पुलिस ने बताया कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई। घायल श्रद्धालुओं को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी स्थिति पर निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि आने वाले समय में ऐसे धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा नियमों का पालन अनिवार्य हो।

परिवारों में मातम, धार्मिक स्थलों की सुरक्षा पर उठ रहे सवाल

मंदिर में हुई इस दुर्घटना ने श्रद्धालुओं और उनके परिवारों में गहरी शोक की लहर फैला दी है। मृतकों के परिवारों में मातम का माहौल है। कई लोगों ने मंदिर और धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण को लेकर सवाल उठाए हैं।

वहीं, प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि सभी मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता और कानूनी मदद मिलेगी। घायलों का उपचार प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि धार्मिक आयोजनों के दौरान भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा नियमों और आपदा प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना कितना जरूरी है।

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