उत्तर प्रदेश का प्रतापगढ़ जिला एक बार फिर एक ऐसी वारदात से दहल उठा है, जिसकी चर्चा हर जुबान पर है। गुलशन उर्फ मुन्ना, जिसकी पहचान इलाके में उसके विशाल परिवार और दो शादियों के कारण थी, की अचानक हुई हत्या ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया था। शुरुआती दौर में पुलिस इसे किसी पुरानी दुश्मनी या जमीनी विवाद का नतीजा मान रही थी, लेकिन जैसे-जैसे जांच की परतें खुलती गईं, कहानी ने एक ऐसा मोड़ लिया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। मुन्ना की मौत का सौदा किसी और ने नहीं, बल्कि उस ‘इश्क’ ने किया था जिसे उसने अपनी दोनों पत्नियों से छिपाकर पाल रखा था। 18 बच्चों के पिता की बेरहमी से हत्या के पीछे जो सच निकलकर सामने आया, उसने मानवीय रिश्तों के काले पक्ष को उजागर कर दिया है।
एक अनोखा परिवार और मुन्ना की दोहरी जिंदगी
प्रतापगढ़ के इस मामले में सबसे हैरान करने वाली बात मुन्ना का निजी जीवन था। मुन्ना ने दो शादियां की थीं और हैरानी की बात यह है कि उसकी दोनों पत्नियां एक ही घर में या आपसी तालमेल के साथ रहती थीं। मुन्ना के कुल 18 बच्चे थे, जो अपने आप में एक बड़ा कुनबा था। इतने बड़े परिवार का मुखिया होने के नाते मुन्ना पर बड़ी जिम्मेदारियां थीं, लेकिन इसके बावजूद वह एक ‘तीसरी’ महिला के साथ प्रेम संबंधों में पड़ गया था। बताया जा रहा है कि मुन्ना अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा और अपना काफी समय उस प्रेमिका को देने लगा था। घर में दो पत्नियों के होने के बावजूद मुन्ना की यह ‘तीसरी दुनिया’ ही अंततः उसके काल का कारण बनी। गांव वालों के लिए मुन्ना एक जिम्मेदार पिता था, लेकिन उसकी इस गुप्त जिंदगी से कोई वाकिफ नहीं था।
प्रेमिका का वो ‘खूनी प्लान’: जब प्यार बना मौत का फंदा
पुलिस की तफ्तीश में यह बात साफ हुई कि मुन्ना की हत्या किसी बाहरी लुटेरे ने नहीं, बल्कि उसके करीबी राजदारों ने ही मिलकर की थी। मुन्ना जिस महिला से प्रेम करता था, उसके साथ उसके संबंध पिछले काफी समय से चल रहे थे। हालांकि, समय के साथ इस रिश्ते में कड़वाहट आने लगी थी। चर्चा है कि मुन्ना उस महिला पर अपना हक जताने लगा था या फिर महिला के जीवन में आए किसी अन्य व्यक्ति को लेकर उनके बीच विवाद होने लगा था। इसी रंजिश के चलते प्रेमिका और उसके कुछ करीबियों ने मुन्ना को रास्ते से हटाने की साजिश रची। एक तय योजना के तहत मुन्ना को मिलने के बहाने एक सुनसान जगह पर बुलाया गया और फिर वहां घात लगाकर बैठे हमलावरों ने उस पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। मुन्ना की चीखें सुनने वाला वहां कोई नहीं था और देखते ही देखते उसका शरीर बेजान हो गया।
पुलिस की रडार पर कॉल डिटेल्स और वो आखिरी फोन कॉल
जब पुलिस को मुन्ना का शव मिला, तो मौके पर संघर्ष के निशान साफ नजर आ रहे थे। प्रतापगढ़ पुलिस ने बिना देर किए मुन्ना के मोबाइल फोन को अपने कब्जे में लिया और उसकी कॉल डिटेल्स (CDR) खंगालनी शुरू की। जांच में पाया गया कि हत्या से कुछ घंटे पहले मुन्ना की एक खास नंबर पर लंबी बातचीत हुई थी और उसी नंबर से उसे लोकेशन भी भेजी गई थी। जब पुलिस ने उस नंबर की स्वामिनी महिला को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की, तो वह ज्यादा देर तक झूठ नहीं टिक पाई। महिला ने कबूल किया कि मुन्ना की दखलअंदाजी उसके जीवन में बढ़ गई थी, जिसके कारण उसने अपने साथियों के साथ मिलकर उसे ठिकाने लगाने का फैसला किया। पुलिस ने इस मामले में हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियारों को बरामद कर लिया है और मुख्य आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है।
पीछे छूट गए 18 अनाथ बच्चे और दो विधवाएं: कौन होगा जिम्मेदार?
मुन्ना की इस मौत ने पीछे कई ऐसे सवाल छोड़े हैं जिनका जवाब समाज को ढूंढना होगा। एक तरफ जहां पुलिस ने अपनी कार्यवाही पूरी कर ली है, वहीं मुन्ना के घर में अब मातम का सन्नाटा पसरा है। दो पत्नियां, जो कभी अपने पति के सहारे इस विशाल परिवार को पाल रही थीं, अब एक-दूसरे का मुंह ताक रही हैं। 18 मासूम बच्चे, जिन्हें शायद यह भी नहीं पता कि उनके पिता अब कभी लौटकर नहीं आएंगे, इस ‘अवैध संबंध’ की भेंट चढ़ गए। यह घटना सबक है उन लोगों के लिए जो अपनी क्षणिक खुशियों के लिए अपने पूरे परिवार के भविष्य को दांव पर लगा देते हैं। मुन्ना के इस अंत ने पूरे प्रतापगढ़ को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि कैसे एक गलत कदम न केवल व्यक्ति को खत्म कर देता है, बल्कि उससे जुड़े दर्जनों लोगों की जिंदगी भी बर्बाद कर देता है।
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