उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर से सस्पेंस और चर्चा का विषय बनी है Dhurandhar: The Revenge। रणवीर सिंह, संजय दत्त, अर्जुन रामपाल और आर माधवन जैसी स्टार कास्ट वाली यह फिल्म रिलीज होते ही सिनेमाघरों में तहलका मचा रही है। फिल्म के हर शो हाउसफुल हैं और 4 दिनों में ही 500 करोड़ रुपये की कमाई पार कर ली गई है। लेकिन इस फिल्म को लेकर Akhilesh Yadav ने बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि सरकार इस तरह की फिल्मों पर पैसा खर्च कर रही है, जिनका उद्देश्य राजनीतिक दलों को बदनाम करना है। सपा प्रमुख ने कहा, “मुझे लगता है कि इनके पास बहुत पैसा है, तभी तो फिल्मों की रिलीज पर भी इतनी भारी राशि लगाई जा रही है। इसमें पूर्व विधायक अतीक अहमद के ISI लिंक और आतंकी कनेक्शन को दिखाया गया है, जो समाजवादी पार्टी के खिलाफ है। हमने इस पर कड़ा विरोध जताया है। सरकार को जनता के पैसे का इस तरह दुरुपयोग नहीं करना चाहिए।” अखिलेश यादव की इस टिप्पणी ने राजनीतिक और फिल्मी दुनिया में नई बहस शुरू कर दी है।
मथुरा में फरसा बाबा की मौत पर उठाए सवाल
सपा अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने केवल फिल्म पर ही टिप्पणी नहीं की, बल्कि मथुरा में हाल ही में हुई फरसा वाले बाबा की मौत को लेकर भी योगी सरकार पर कटाक्ष किया। अखिलेश यादव ने कहा, “जरा सोचिए, मथुरा में क्या हुआ। एक संत की हत्या हो गई और अब तरह-तरह की कहानियां सुनाई जा रही हैं। सवाल यह उठता है कि कौन जिम्मेदार था, मकान मालिक कौन था, प्रशासन क्या कर रहा था और अधिकारी किन हालात में काम कर रहे हैं।” उनका यह बयान स्थानीय प्रशासन और सरकार के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। अखिलेश यादव का कहना है कि इस तरह की घटनाओं में जवाबदेही तय होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह बयान आगामी चुनावी मौसम में सियासी बहस का हिस्सा बन सकता है।
फिल्म और राजनीति का मेल: धुरंधर-2 का असर
धुरंधर-2 को केवल एक फिल्म के रूप में नहीं देखा जा रहा है। इसके अंदर दर्शाए गए राजनीतिक संदर्भ और वास्तविक नेताओं के जुड़ाव ने इसे विवादित बना दिया है। अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) का आरोप है कि सरकार इस फिल्म के माध्यम से विपक्ष के नेताओं को बदनाम करने की कोशिश कर रही है। सिनेमा और राजनीति का यह मेल दर्शकों और जनता के बीच बहस का विषय बन चुका है। जब फिल्मों में राजनीतिक संदेश जोड़े जाते हैं, तो इसका असर व्यापक रूप से जनता और मीडिया पर पड़ता है। इस वजह से फिल्म के निर्माता और वितरक लगातार आलोचनाओं के घेरे में हैं, जबकि सियासी दल इसे चुनावी रणनीति के रूप में भी देख रहे हैं।
सियासत और सुरक्षा पर सवाल: फरसा बाबा केस
मथुरा में फरसा बाबा की मौत ने राज्य की कानून व्यवस्था और सुरक्षा तंत्र पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने सरकार से मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदारों को कानून के तहत सजा मिले। उन्होंने कहा कि संतों और समाज के प्रतिष्ठित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य की जिम्मेदारी है। इस तरह की घटनाओं पर राजनीतिक बयानबाजी आम होती है, लेकिन जनता और मीडिया के दबाव में प्रशासनिक कार्रवाई भी तेज होती है। फरसा बाबा केस और धुरंधर फिल्म विवाद दोनों ही सियासत और समाज पर गहरी छाप छोड़ रहे हैं।
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