Homeदेश35 साल बाद आखिर बिक ही गई दाऊद की जमीन! कौन है...

35 साल बाद आखिर बिक ही गई दाऊद की जमीन! कौन है वो शख्स जिसने लगाई सबसे बड़ी बोली?

Dawood Ibrahim की रत्नागिरी स्थित पुश्तैनी जमीन 35 साल बाद नीलाम। जानें कौन बना खरीदार, कितनी लगी बोली और क्यों बार-बार फेल हो रही थी नीलामी।

-

कुख्यात अंडरवर्ल्ड डॉन Dawood Ibrahim से जुड़ी रत्नागिरी की पुश्तैनी जमीनों को आखिरकार खरीदार मिल गया है। केंद्र सरकार द्वारा 5 मार्च को कराई गई नीलामी में मुंबई के एक बोलीदाता ने चारों कृषि प्लॉट्स के लिए सबसे ऊंची बोली लगाई। ये संपत्तियां Ratnagiri जिले के खेड तालुका स्थित मुंबाके गांव में हैं, जिसे दाऊद का पैतृक गांव माना जाता है। लंबे समय से अटकी इन जमीनों की बिक्री अब आगे बढ़ती दिख रही है, जिससे प्रशासन को बड़ी राहत मिली है।

 किस कानून के तहत हुई नीलामी?

Dawood Ibrahim की इन जमीनों की नीलामी ‘स्मगलर्स एंड फॉरेन एक्सचेंज मैनिपुलेटर्स (प्रॉपर्टी जब्ती) कानून’ यानी SAFEMA के तहत की गई। इस कानून के जरिए अपराध से जुड़ी संपत्तियों को जब्त कर सरकार के कब्जे में लिया जाता है और बाद में उन्हें नीलाम किया जाता है। जानकारी के मुताबिक, ये जमीनें पहले दाऊद की मां अमीना बी के नाम पर दर्ज थीं। 1990 के दशक में इन्हें जब्त किया गया था, खासतौर पर 1993 मुंबई ब्लास्ट के बाद हुई कार्रवाई के तहत।

 खरीदार कौन? और आगे क्या होगा?

Dawood Ibrahim की नीलामी में सबसे ऊंची बोली लगाने वाला शख्स मुंबई का बताया जा रहा है, हालांकि उसकी पहचान फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है। नियमों के अनुसार, उसे अप्रैल 2026 की शुरुआत तक पूरी रकम जमा करनी होगी। इसके बाद संबंधित प्राधिकरण से मंजूरी मिलने पर जमीनों का ट्रांसफर पूरा किया जाएगा। चारों प्लॉट्स में सर्वे नंबर 442 (हिस्सा 13-B) सबसे चर्चित रहा, जिसकी रिजर्व कीमत करीब 9.41 लाख रुपये थी, लेकिन इसके लिए 10 लाख रुपये से ज्यादा की बोली लगी। बाकी तीन प्लॉट्स (सर्वे नंबर 533, 453 और 61) को भी एक ही बोलीदाता ने खरीद लिया।

 बार-बार फेल हुई नीलामी, अब जाकर मिली सफलता

Dawood Ibrahim की इन जमीनों की नीलामी पिछले कई सालों से लगातार असफल हो रही थी। 2017, 2020, 2024 और 2025 में भी कोशिशें की गईं, लेकिन हर बार या तो कोई बोलीदाता नहीं आया या प्रक्रिया अधूरी रह गई। दाऊद और उसकी डी-कंपनी से जुड़ा नाम होने के कारण लोग इन संपत्तियों से दूरी बनाते रहे। इसके अलावा गांव में स्थित होना, सीमित उपयोग और तुरंत मुनाफा न दिखना भी बड़ी वजह रही। पहले भी Ajay Srivastava जैसे खरीदारों ने दाऊद से जुड़ी संपत्तियां खरीदी थीं, लेकिन कई मामलों में उन्हें कब्जा तक नहीं मिल पाया। अब इस बार सफल नीलामी को प्रशासन एक बड़ी उपलब्धि मान रहा है।

Read More-कतर के गैस प्लांट पर हुए हमले से क्यों घबराया भारत? देश में महंगी हो सकती है LPG

Related articles

Leave a reply

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
0FollowersFollow
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

Latest posts