मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच दुनिया की नजर एक बार फिर हॉर्मुज स्ट्रेट पर टिक गई है। इसी बीच Sanae Takaichi ने संसद में बड़ा बयान देते हुए कहा कि फिलहाल जापान के पास इस जलमार्ग से गुजरने वाले तेल टैंकरों की सुरक्षा के लिए अपने नौसैनिक जहाज भेजने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार अभी इस मुद्दे पर कोई अंतिम निर्णय नहीं ले पाई है और सभी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जापान को यह देखना होगा कि वह अपने कानूनी ढांचे और राष्ट्रीय हितों के भीतर रहते हुए क्या कदम उठा सकता है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब Donald Trump लगातार अपने सहयोगी देशों से इस रणनीतिक जलमार्ग की सुरक्षा में सहयोग करने की अपील कर रहे हैं।
नेवल कोएलिशन की योजना और बढ़ती कूटनीतिक हलचल
अमेरिका की पहल पर एक अंतरराष्ट्रीय नेवल कोएलिशन बनाने की चर्चा तेज हो गई है। इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक माने जाने वाले Strait of Hormuz में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका आने वाले दिनों में इस गठबंधन को औपचारिक रूप देने की दिशा में कदम उठा सकता है। बताया जा रहा है कि अगले 72 घंटे इस मामले में बेहद अहम साबित हो सकते हैं। यदि यह गठबंधन बनता है तो कई देशों के युद्धपोत इस इलाके में तैनात किए जा सकते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा कदम उठाने से क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव और बढ़ सकता है, खासकर जब अमेरिका और ईरान के बीच पहले से ही संबंध बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।
दुनिया के तेल व्यापार के लिए क्यों अहम है यह जलमार्ग
हॉर्मुज स्ट्रेट को वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की सबसे महत्वपूर्ण लाइनों में से एक माना जाता है। अनुमान के मुताबिक दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की सप्लाई इसी समुद्री रास्ते से होकर गुजरती है। यह जलमार्ग फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और कई प्रमुख तेल उत्पादक देशों के निर्यात का मुख्य रास्ता है। हाल के महीनों में मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष और समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताओं के कारण यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। इसके असर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। अगर इस मार्ग पर लंबे समय तक संकट बना रहता है तो इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। भारत, चीन और जापान जैसे कई बड़े तेल आयातक देश भी इस मार्ग पर निर्भर हैं, इसलिए यहां की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
कई देशों से युद्धपोत भेजने की अपील, लेकिन फैसला अभी बाकी
अमेरिका प्रशासन ने इस मिशन में कई देशों को शामिल करने की कोशिश शुरू कर दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों से अपने युद्धपोत भेजने का अनुरोध किया है ताकि समुद्री सुरक्षा को मजबूत किया जा सके। हालांकि अभी तक किसी भी देश ने सार्वजनिक रूप से इस प्रस्ताव पर अंतिम सहमति नहीं दी है। कई देश इस मामले में सावधानी बरत रहे हैं क्योंकि इस तरह की सैन्य तैनाती क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकती है। जापान का ताजा बयान भी इसी सतर्क नीति की ओर इशारा करता है। फिलहाल दुनिया की नजर आने वाले दिनों पर टिकी हुई है, क्योंकि हॉर्मुज स्ट्रेट से जुड़ा कोई भी बड़ा फैसला वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों को प्रभावित कर सकता है।
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