मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और Strait of Hormuz के रास्ते तेल और गैस के जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने के बाद भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को लेकर तेजी से कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है और भारत भी लंबे समय से इसी रास्ते के जरिए खाड़ी देशों से कच्चा तेल और एलपीजी गैस मंगाता रहा है। हालिया संकट के कारण इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही में बाधा आई तो सरकार और तेल कंपनियों के सामने आपूर्ति बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई। इसी स्थिति को देखते हुए भारत ने तुरंत वैकल्पिक स्रोत और नए आपूर्ति मार्गों की तलाश शुरू कर दी है, ताकि देश में रसोई गैस और पेट्रोल-डीजल की कमी न होने पाए।
रूस बना सबसे बड़ा वैकल्पिक स्रोत
ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए भारत ने सबसे पहले रूस की ओर रुख किया है। हाल के दिनों में भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद में तेजी देखी गई है। आंकड़ों के मुताबिक मार्च के शुरुआती दिनों में रूस से कच्चे तेल का आयात लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ गया है। पहले जहां भारत करीब 10 लाख बैरल प्रतिदिन तेल खरीद रहा था, वहीं अब यह आंकड़ा करीब 15 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया है। भारत की प्रमुख तेल कंपनियां जैसे Indian Oil Corporation और Reliance Industries ने भी रूस से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की खरीद के समझौते किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार इन कंपनियों ने करीब तीन करोड़ बैरल तेल की खरीद के सौदे किए हैं, जिससे आने वाले समय में आपूर्ति स्थिर रखने में मदद मिल सकती है।
अमेरिका, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका से भी बढ़ी खरीद
भारत अब ऊर्जा आपूर्ति के लिए केवल खाड़ी देशों पर निर्भर नहीं रहना चाहता। यही कारण है कि भारतीय कंपनियों ने अमेरिका, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे नए बाजारों की ओर भी कदम बढ़ाए हैं। सरकारी गैस कंपनी GAIL ने अमेरिका के साथ एलएनजी गैस के कई बड़े समझौते किए हैं, ताकि घरेलू जरूरतों को पूरा किया जा सके। इसके अलावा भारत ने पहली बार लैटिन अमेरिकी देश Guyana से सीधे कच्चे तेल की खरीद शुरू की है। इंडियन ऑयल और Hindustan Petroleum Corporation Limited ने वहां से करीब 40 लाख बैरल तेल मंगाने का फैसला किया है। वहीं पश्चिमी अफ्रीका के देशों नाइजीरिया और अंगोला से भी अतिरिक्त तेल मंगाया जा रहा है। इन कदमों से यह साफ संकेत मिलता है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अब कई अलग-अलग स्रोत तैयार कर रहा है।
भारत की ऊर्जा जरूरत और सरकार की रणनीति
भारत दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ताओं में से एक है और अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। देश लगभग 88 प्रतिशत कच्चे तेल की जरूरत बाहर से खरीदता है, जबकि रसोई गैस यानी एलपीजी की करीब 55 प्रतिशत मांग भी आयात से पूरी होती है। इसके अलावा लगभग 30 प्रतिशत एलएनजी गैस भी विदेशी बाजारों से आती है। पहले इनमें से बड़ी मात्रा खाड़ी देशों से आती थी, लेकिन मौजूदा हालात ने भारत को नई रणनीति अपनाने के लिए मजबूर कर दिया है। सरकार का मानना है कि अगर कई देशों से तेल और गैस की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए तो किसी एक क्षेत्र में संकट आने पर भी देश की ऊर्जा जरूरतों पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। इसी रणनीति के तहत भारत ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अल्जीरिया जैसे देशों के साथ भी संभावित समझौतों पर चर्चा कर रहा है, ताकि भविष्य में एलपीजी और पेट्रोल-डीजल की सप्लाई सुरक्षित रह सके।
