मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव को लेकर भारत सरकार पूरी तरह सतर्क है। राज्यसभा में विदेश मंत्री S. Jaishankar ने कहा कि सरकार विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। उन्होंने बताया कि 28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष में कई लोगों की जान जा चुकी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस टकराव में Iran के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े कुछ लोगों की भी मौत हुई है, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की
विदेश मंत्री ने संसद को जानकारी देते हुए कहा कि भारत ने इस संकट को लेकर सभी पक्षों से संयम और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। भारत का मानना है कि किसी भी तरह का सैन्य टकराव क्षेत्रीय स्थिरता के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि भारत का रुख हमेशा शांति, संवाद और कूटनीतिक समाधान का रहा है और इस मामले में भी वही नीति अपनाई जा रही है।
CCS बैठक में हालात की समीक्षा, मंत्रालयों को दिए निर्देश
मिडिल ईस्ट में तेजी से बदलते हालात को देखते हुए 1 मार्च को Cabinet Committee on Security की एक अहम बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में Iran पर हुए हमलों और उसके बाद के हालात की विस्तार से समीक्षा की गई। सरकार ने क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक असर जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की। बैठक के बाद सभी संबंधित मंत्रालयों को निर्देश दिए गए कि वे संभावित परिस्थितियों के लिए तैयार रहें और जरूरत पड़ने पर तुरंत कदम उठाएं।
खाड़ी देशों में 1 करोड़ भारतीय, सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
जयशंकर ने बताया कि मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष भारत के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि खाड़ी क्षेत्र में लगभग 1 करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं। इसके अलावा Iran में भी कई भारतीय छात्र पढ़ाई कर रहे हैं और कुछ लोग व्यापार या नौकरी के सिलसिले में वहां मौजूद हैं। सरकार इन सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दूतावासों और संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क में है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर भारतीयों की मदद के लिए तुरंत कदम उठाए जाएंगे।
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