Sunday, March 1, 2026
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“मेरे खामेनेई को धोखे से मारा…”  लखनऊ की सड़कों पर मातम, महिलाओं की आंखों में आंसू और गुस्से का उबाल

अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन की खबर के बाद लखनऊ में मुस्लिम महिलाएं सड़कों पर उतरीं। ‘धोखे से मारा’ के आरोपों के बीच अमेरिका-इजराइल के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन हुआ। जानिए पूरी खबर।

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ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन की खबर जैसे ही सामने आई, उसका असर केवल मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं रहा बल्कि भारत के कई शहरों में भी भावनात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में इस खबर ने गहरा असर डाला। खबर फैलते ही शहर के कई इलाकों में लोग घरों से बाहर निकल आए। खासकर मुस्लिम समुदाय के बीच शोक की लहर दौड़ गई। कई लोगों ने इसे वैश्विक राजनीति का बड़ा मोड़ बताया, तो कई ने इसे अन्यायपूर्ण कार्रवाई करार दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि खामेनेई को वे केवल एक राजनीतिक नेता नहीं, बल्कि एक धार्मिक और वैचारिक प्रतीक के रूप में देखते थे। यही वजह रही कि उनकी मौत की सूचना ने भावनात्मक माहौल पैदा कर दिया।

सड़कों पर रोती महिलाएं, ‘धोखे से मारा’ का आरोप

लखनऊ के कई इलाकों में बड़ी संख्या में महिलाएं सड़कों पर उतर आईं। कुछ महिलाएं फफक-फफक कर रोती नजर आईं, तो कुछ ने गुस्से में नारेबाजी की। एक महिला ने रोते हुए कहा, “मेरे खामेनेई को धोखे से मारा गया।” उनके इस बयान ने वहां मौजूद भीड़ में और भावनात्मक माहौल पैदा कर दिया। प्रदर्शन कर रहीं महिलाओं का कहना था कि यह सीधा हमला केवल एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि उनके विश्वास पर है। कई महिलाओं ने अमेरिका और इजराइल के खिलाफ नाराजगी जताई और कहा कि यह कार्रवाई विश्वासघात है। प्रदर्शन के दौरान कुछ महिलाएं अपने बच्चों के साथ भी मौजूद थीं। वे लगातार नारे लगाते हुए अपने दुख और आक्रोश को जाहिर कर रही थीं। माहौल पूरी तरह भावनात्मक था, जहां आंसू और नारों की आवाज एक साथ सुनाई दे रही थी।

घंटाघर और इमामबाड़ा बना विरोध का केंद्र

महिलाओं के साथ-साथ पुरुषों ने भी इस घटना पर अपना विरोध दर्ज कराया। लखनऊ के घंटाघर और बड़े इमामबाड़े के आसपास बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए। वहां अमेरिका और इजराइल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। प्रदर्शनकारियों के हाथों में बैनर और पोस्टर थे, जिनमें खामेनेई के समर्थन और कथित हमले की निंदा वाले संदेश लिखे थे। कई लोगों ने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति की खतरनाक दिशा है और इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की कोशिश की, हालांकि भावनाएं काफी उफान पर थीं। प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे। पुलिस बल मौके पर तैनात रहा और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की गई।

वैश्विक तनाव के बीच भारत में बढ़ी हलचल

अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ देशों में शोक मनाया जा रहा है, तो कुछ स्थानों पर विरोध और समर्थन दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं देखी गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना का असर मध्य-पूर्व की राजनीति और वैश्विक संबंधों पर पड़ सकता है। भारत में भी इस खबर ने बहस को जन्म दिया है। सोशल मीडिया पर लोग अपनी-अपनी राय रख रहे हैं। कुछ लोग इसे वैश्विक संघर्ष का गंभीर चरण बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे राजनीतिक रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं। फिलहाल लखनऊ में स्थिति सामान्य है, लेकिन भावनात्मक माहौल बना हुआ है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है और इसका वैश्विक राजनीति पर कितना असर पड़ता है।

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