दक्षिण एशिया के दो पड़ोसी देश, अफगानिस्तान और पाकिस्तान, अब एक ऐसे मोड़ पर आ खड़े हुए हैं जहाँ से वापसी का रास्ता सिर्फ तबाही की ओर जाता दिख रहा है। डूरंड रेखा पर शुरू हुई छिटपुट फायरिंग अब एक पूर्ण सैन्य संघर्ष में तब्दील हो गई है। रात भर आसमान से गिरती मिसाइलों और ज़मीन पर गरजती तोपों ने यह साफ कर दिया है कि अब संयम का बांध टूट चुका है। तालिबान शासित अफगानिस्तान ने जहाँ पाकिस्तान के अंदरूनी इलाकों जैसे इस्लामाबाद और एबटाबाद तक ड्रोन हमले किए हैं, वहीं पाकिस्तानी वायुसेना ने काबुल और कंधार को निशाना बनाया है। इस बारूद की गंध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पाकिस्तान के पक्ष में दिए गए बयान ने आग में घी डालने का काम किया है, जिससे पूरी दुनिया की नजरें अब इस नए युद्ध क्षेत्र पर टिक गई हैं।
तालिबान का ‘ऑपरेशन इस्लामाबाद’: ड्रोन हमलों से दहला पाकिस्तान
तालिबान की वायुसेना ने इस बार अप्रत्याशित आक्रामकता दिखाते हुए पाकिस्तान के सुरक्षित माने जाने वाले ठिकानों को अपना निशाना बनाया है। शुक्रवार की सुबह करीब 11 बजे तालिबान के ड्रोन्स ने इस्लामाबाद, नौशेरा के कैंट इलाके, जमरूद की मिलिट्री कॉलोनी और एबटाबाद में सटीक हमले किए। तालिबान के उप-प्रवक्ता हमदुल्ला फितरत ने दावा किया है कि ये ऑपरेशन 100% सफल रहे और पाकिस्तानी सेना के कई रणनीतिक ठिकानों को भारी नुकसान पहुँचाया गया है। अफगान रक्षा मंत्रालय का दावा है कि सीमा पर जारी जमीनी संघर्ष में उन्होंने अब तक 55 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया है और 19 सैन्य चौकियों पर कब्जा कर लिया है। तालिबान का कहना है कि वे केवल अपनी संप्रभुता की रक्षा कर रहे हैं और पाकिस्तान ने पहले रिहायशी इलाकों पर हमला कर उन्हें उकसाया है।
पाकिस्तान का ‘गजाब लिल-हक’ और ट्रंप का खुला समर्थन
दूसरी ओर, पाकिस्तान ने इस युद्ध को ‘गजाब लिल-हक’ (हक का गजब) नाम देते हुए तालिबान के खिलाफ चौतरफा हमला बोल दिया है। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने दो टूक शब्दों में कहा है कि उनका धैर्य अब जवाब दे चुका है और वे अब अफगानिस्तान के साथ खुली जंग की स्थिति में हैं। पाकिस्तान का दावा है कि उन्होंने जवाबी कार्रवाई में 133 तालिबानी लड़ाकों को ढेर कर दिया है। इस तनावपूर्ण माहौल में सबसे बड़ा ‘ट्विस्ट’ वाशिंगटन से आया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के साथ अपनी दोस्ती का सार्वजनिक इजहार करते हुए कहा कि वह इस मुश्किल घड़ी में पाकिस्तान के साथ खड़े हैं। ट्रंप के इस बयान ने काबुल को गहरे सदमे में डाल दिया है, क्योंकि तालिबान को उम्मीद थी कि अमेरिका कम से कम इस मामले में तटस्थ रहेगा।
‘उंगली का जवाब मुक्का’: अफगान सेना प्रमुख की आखिरी चेतावनी
जंग के मैदान में बढ़ती तपिश के बीच अफगान सेना प्रमुख फसीहुद्दीन फितरत का बयान सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया है। उन्होंने पाकिस्तान को सीधी चुनौती देते हुए कहा, “अगर कोई हमारी तरफ एक उंगली उठाएगा, तो हम उसका जवाब मुक्के से देंगे। अब इस्लामाबाद भी सुरक्षित नहीं रहेगा।” अफगान सेना प्रमुख की यह चेतावनी महज़ शब्दों की लफ्फाजी नहीं लगती, क्योंकि तालिबान ने डूरंड रेखा के पास भारी मात्रा में गोला-बारूद और टैंक तैनात कर दिए हैं। वहीं, नांगरहार के रिफ्यूजी कैंपों पर हुई मिसाइल बारी में महिलाओं और बच्चों के घायल होने से अफगानी जनता में पाकिस्तान के खिलाफ भारी आक्रोश है। दुनिया भर के कूटनीतिज्ञ डरे हुए हैं कि अगर यह जंग जल्द नहीं रुकी, तो यह पूरे मध्य एशिया को अपनी चपेट में ले सकती है।
