उत्तर प्रदेश के हमिरपुर जिले में एक ऐसी बारात निकली जिसने आधुनिक शादियों की चमक-दमक को पीछे छोड़ दिया। यहां न तो डीजे की तेज आवाज थी और न ही लग्जरी गाड़ियों की लंबी कतार, बल्कि करीब 25 बैलगाड़ियों में सजी बारात पूरे देसी अंदाज में निकली। गांव की गलियों से लेकर मुख्य रास्तों तक यह बारात लगभग 3 किलोमीटर लंबी दिखाई दी। दूल्हा पारंपरिक वेशभूषा में सजी बैलगाड़ी पर सवार था और उसके पीछे रिश्तेदार, दोस्त और गांव के लोग अलग-अलग बैलगाड़ियों में चलते नजर आए। इस अनोखे नजारे को देखने के लिए आसपास के गांवों से भी लोग उमड़ पड़े। कई बुजुर्गों ने कहा कि उन्होंने अपने बचपन में ऐसी बारातें देखी थीं, लेकिन वर्षों बाद यह दृश्य फिर देखने को मिला।
क्यों खास बनी यह बैलगाड़ी बारात?
यह बारात सिर्फ एक शादी का जुलूस नहीं थी, बल्कि एक संदेश भी थी। परिवार ने जानबूझकर आधुनिक साधनों की जगह परंपरागत तरीके को चुना। उनका कहना था कि शादी दिखावे का नहीं, संस्कार और परंपरा का अवसर है। बैलगाड़ियों को रंग-बिरंगे कपड़ों और फूलों से सजाया गया था। ढोलक और लोकगीतों की धुन पर महिलाएं गाती-बजाती चल रही थीं। पूरे माहौल में सादगी और अपनापन झलक रहा था। गांव के युवाओं के लिए यह अनुभव नया था, जबकि बुजुर्गों के लिए यादों का खजाना। बिना शोर-शराबे और प्रदूषण के यह शादी पर्यावरण के अनुकूल भी रही। लोगों ने इसे सादगी, परंपरा और सामाजिक जुड़ाव का सुंदर उदाहरण बताया।
बुंदेलखंड की विरासत को मिला नया जीवन
बुंदेलखंड क्षेत्र अपनी लोक संस्कृति और परंपराओं के लिए जाना जाता है। यहां पहले शादियों में बैलगाड़ियों से बारात निकालना आम बात थी। समय के साथ आधुनिकता के प्रभाव में यह परंपरा लगभग खत्म हो गई। लेकिन हमीरपुर की इस शादी ने दिखाया कि अगर इच्छा हो तो पुरानी परंपराओं को दोबारा जीवित किया जा सकता है। ग्रामीणों का मानना है कि ऐसी पहल से नई पीढ़ी अपनी जड़ों को समझ पाएगी और अपनी सांस्कृतिक पहचान पर गर्व महसूस करेगी। यह आयोजन सिर्फ एक परिवार का निजी फैसला नहीं, बल्कि पूरे इलाके के लिए प्रेरणा बन गया है। कई लोगों ने कहा कि वे भी आने वाले समय में इसी तरह की सादगीपूर्ण और पारंपरिक शादी करना चाहेंगे।
सोशल मीडिया पर वायरल, लोग कर रहे तारीफ
इस अनोखी बारात की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए हैं। लोग इसे “देसी और दिल से जुड़ी शादी” बता रहे हैं। जहां एक ओर शादियों में लाखों-करोड़ों रुपये खर्च करने का चलन बढ़ रहा है, वहीं यह आयोजन सादगी और सांस्कृतिक मूल्यों की मिसाल बन गया है। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने लिखा कि असली खुशी दिखावे में नहीं, बल्कि अपनों के साथ सादगी से जश्न मनाने में है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि ऐसे आयोजन न केवल परंपराओं को जीवित रखते हैं, बल्कि सामाजिक एकता को भी मजबूत करते हैं।
कुल मिलाकर, हमीरपुर की यह 25 बैलगाड़ियों वाली 3 किलोमीटर लंबी बारात सिर्फ एक शादी नहीं थी, बल्कि बुंदेलखंड की सदियों पुरानी परंपरा की वापसी का प्रतीक बन गई। इसने यह साबित कर दिया कि आधुनिकता के दौर में भी अपनी जड़ों से जुड़कर खुशियां मनाई जा सकती हैं।
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