शंकराचार्य मठ को लेकर लेखिका भूमिका द्विवेदी के बयान सामने आने के बाद हलचल मच गई है। भूमिका द्विवेदी का कहना है कि वह साल 2000 में करीब दो महीने तक शंकराचार्य के मठ में रहीं। इस दौरान उन्होंने जो देखा, वह एक धार्मिक आश्रम की आम सोच से बिल्कुल अलग था। उन्होंने दावा किया कि मठ का माहौल वैसा पवित्र नहीं था जैसा बाहर से दिखाया जाता है। उनके अनुसार, मठ में कई ऐसी जगहें और कमरे थे, जहां आम लोगों का जाना सख्त मना था। जब भी शंकराचार्य मठ में आते थे, तो पूरा मठ खाली करा दिया जाता था और केवल कुछ गिने-चुने लोग ही अंदर रहते थे। भूमिका ने यह भी कहा कि आश्रम में रहने वाले बच्चों को अपने माता-पिता या अभिभावकों से बात करने की इजाजत नहीं दी जाती थी, जिससे उन्हें शुरू से ही सब कुछ अजीब लगता था।
सीक्रेट कमरे, संगमरमर की इमारत और स्विमिंग पूल का दावा
भूमिका द्विवेदी ने बताया कि मठ की पूरी इमारत संगमरमर से बनी हुई है और उसमें कई मंजिलें हैं। उनके अनुसार, मठ में लिफ्ट लगी हुई है और सबसे ऊपरी मंजिल पर स्विमिंग पूल होने की बात कही जाती है। उन्होंने दावा किया कि कुछ हिस्से ऐसे थे, जिन्हें पूरी तरह सीक्रेट रखा गया था और वहां किसी को जाने नहीं दिया जाता था। भूमिका का कहना है कि पहली मंजिल पर ऑफिस का काम होता था, दूसरी मंजिल पर खाने-पीने की व्यवस्था थी और तीसरी मंजिल पर लोगों के रहने की जगह थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मठ में पूजा-पाठ और सख्त दिनचर्या का माहौल नहीं दिखता था। उनके मुताबिक, वहां रहने वाले लोग आराम और ऐश की जिंदगी जीते नजर आते थे, जो एक शंकराचार्य मठ की छवि से मेल नहीं खाता।
सखी, बच्चों और रिश्तों को लेकर गंभीर आरोप
भूमिका द्विवेदी ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर भी कई दावे किए हैं। उन्होंने कहा कि मठ में एक महिला है, जो खुद को शंकराचार्य की सखी बताती है। भूमिका का दावा है कि लोगों से उन्होंने सुना कि शंकराचार्य उस महिला के यहां जाकर रुकते और सोते हैं, हालांकि उन्होंने साफ कहा कि उनके पास इसका कोई पुख्ता सबूत नहीं है। उन्होंने बताया कि मठ में करीब 20 बच्चे रहते थे और एडमिशन के समय बड़ी संख्या में बच्चों में से कुछ को ही चुना जाता था। इन बच्चों को बाहर की दुनिया से लगभग काटकर रखा जाता था। भूमिका ने यह भी कहा कि शंकराचार्य ने कुछ लोगों, खासतौर पर अपनी बहनों को कोठियां दी हैं, लेकिन इस बात का भी उनके पास कोई दस्तावेजी प्रमाण नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका शंकराचार्य से कोई निजी विवाद नहीं है और वे उनसे कभी आमने-सामने नहीं मिलीं।
“खजाना, लग्जरी बस और अब भी अनुत्तरित सवाल”
भूमिका द्विवेदी का यह भी दावा है कि मठ के अंदर बहुत बड़ा खजाना है, जिसमें रत्न और कीमती सामान मौजूद हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि मठ की सबसे ऊंची मंजिल पर जाने वाली अंदरूनी सीढ़ियों पर आम लोगों को क्यों नहीं जाने दिया जाता। भूमिका के अनुसार, शंकराचार्य एक खास तरह की लग्जरी बस में चलते हैं, जो सिर्फ उनके लिए बनाई गई है। इसके अलावा उनके पास एक वैनिटी वैन भी है, जिसमें हर तरह की आधुनिक सुविधाएं हैं और वे उसी में रहते हैं। भूमिका ने कहा कि वह ये सारी बातें किसी दुश्मनी या बदले की भावना से नहीं बता रहीं, बल्कि मीडिया के सवालों के जवाब में अपना अनुभव साझा कर रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उनके परिवार का नाता पहले के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती से रहा है। फिलहाल इस पूरे मामले पर मठ प्रशासन या शंकराचार्य की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, ऐसे में भूमिका द्विवेदी के ये दावे कई सवाल खड़े कर रहे हैं।
