देशभर में उस समय हलचल मच गई जब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर यौन शोषण के आरोप लगाए गए। इस मामले में प्रयागराज में केस दर्ज हुआ है और अदालत ने भी संज्ञान लिया है। जैसे ही यह खबर सामने आई, लोगों का ध्यान आरोप लगाने वाले व्यक्ति की ओर गया। सोशल मीडिया और इंटरनेट पर एक नाम तेजी से सर्च किया जाने लगा – आशुतोष महाराज। लोग जानना चाहते हैं कि आखिर वह कौन हैं जिन्होंने इतने बड़े धार्मिक पद पर बैठे संत पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक और धार्मिक हलकों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। आरोपों की जांच अपनी प्रक्रिया में है, लेकिन आरोप लगाने वाले आशुतोष महाराज की पृष्ठभूमि को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। उनके बारे में अलग-अलग दावे और आरोप सामने आ रहे हैं, जिनकी वजह से यह मामला और भी चर्चा में आ गया है।
कांधला का रहने वाला, मंदिर प्रबंधन से जुड़ा नाम
बताया जाता है कि आशुतोष महाराज उर्फ आशुतोष पांडेय जनपद शामली के कांधला थाना क्षेत्र के रायजादगान इलाके के निवासी हैं। स्थानीय स्तर पर उन्हें माता शाकुंभरी देवी भवन मंदिर के प्रबंधक के रूप में जाना जाता है। मंदिर को लेकर उनका एक साधु लाल साधु राम के साथ लंबा विवाद भी रहा था। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस विवाद के दौरान आपसी समझौते की बात सामने आई थी, जिसके बाद मंदिर प्रबंधन का जिम्मा आशुतोष और उनके परिवार के पास आ गया।
इसी बीच एक कथित पत्र भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें दावा किया गया कि आशुतोष पांडेय के खिलाफ कांधला थाने में कई मुकदमे दर्ज हैं। हालांकि इस पत्र की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन इसके वायरल होने के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ गई। कुछ लोग इसे बदनाम करने की साजिश बता रहे हैं, तो कुछ इसे गंभीर सवालों से जोड़ रहे हैं। फिलहाल पुलिस या प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई अंतिम आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
दर्ज मुकदमों और स्थानीय आरोपों को लेकर उठे सवाल
स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों का आरोप है कि आशुतोष पांडेय के खिलाफ 20 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। कुछ लोग संख्या 26 या 27 तक भी बताते हैं, हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। कांधला क्षेत्र के कुछ निवासियों ने मीडिया के सामने आकर दावा किया कि वे खुद को आशुतोष की कार्यशैली से पीड़ित मानते हैं। उनका आरोप है कि झूठे मुकदमों में फंसाकर दबाव बनाने और संपत्ति विवाद खड़े करने जैसी घटनाएं हुई हैं।
एक व्यक्ति मुकेश ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ भी यौन शोषण से जुड़े मुकदमे दर्ज कराए गए, जबकि उनका कहना है कि यह संपत्ति विवाद का मामला था। वहीं विजय नाम के एक अन्य व्यक्ति ने दावा किया कि उन पर एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया। इन सभी आरोपों की सच्चाई क्या है, यह अदालत और जांच एजेंसियां तय करेंगी, लेकिन इन दावों के चलते आशुतोष पांडेय का नाम विवादों में बना हुआ है। कुछ लोगों ने उन्हें हिस्ट्रीशीटर तक बताया है, हालांकि इसकी पुष्टि आधिकारिक रिकॉर्ड से होना आवश्यक है।
नाम बदलने की कहानी और दोहरी पहचान का दावा
स्थानीय लोगों के अनुसार आशुतोष पांडेय का मूल नाम आशु या अश्वनी बताया जाता है। कुछ दावों में कहा गया है कि वर्ष 2003 की सूची में उनका नाम आशु शर्मा के रूप में दर्ज था। बाद में उन्होंने अपना नाम बदलकर आशुतोष पांडेय कर लिया। यह भी कहा जाता है कि वर्ष 2006 में मुजफ्फरनगर में तैनात एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के नाम से प्रभावित होकर उन्होंने अपना नाम परिवर्तित किया। हालांकि इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि वे अलग-अलग नामों से सोशल मीडिया आईडी चलाते हैं। वहीं उनके समर्थक इन सभी आरोपों को निराधार बताते हैं और कहते हैं कि यह सब उन्हें बदनाम करने की कोशिश है। फिलहाल, शंकराचार्य पर लगाए गए आरोपों की जांच न्यायिक प्रक्रिया में है और साथ ही आरोप लगाने वाले व्यक्ति की पृष्ठभूमि भी जांच के दायरे में आ चुकी है। आने वाले समय में जांच एजेंसियों और अदालत के फैसलों से ही यह साफ हो पाएगा कि सच्चाई क्या है। तब तक यह मामला धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है।

