Friday, February 20, 2026
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UP: सीएम योगी का शिक्षामित्रों को बड़ा तोहफा, सैलरी में 80% का हुआ इजाफा, अब इतना मिलेगा मानदेय

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UP Siksha Mitra Salary: उत्तर प्रदेश की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी एक बड़ी खबर बजट सत्र के दौरान सामने आई, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में शिक्षामित्रों के मानदेय में भारी बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया। 20 फरवरी को सदन में बोलते हुए सीएम ने घोषणा की कि 1 अप्रैल से प्रदेश के शिक्षामित्रों को हर महीने 18,000 रुपये मानदेय दिया जाएगा। अभी तक उन्हें 10,000 रुपये प्रतिमाह मिलते थे। इस तरह सीधे 8,000 रुपये की बढ़ोतरी कर सरकार ने लगभग 80 प्रतिशत इजाफा कर दिया है।

सीएम ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार ने पहले भी शिक्षामित्रों की स्थिति सुधारने के लिए कदम उठाए थे और अब एक बार फिर उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने का फैसला लिया गया है। प्रदेश में करीब डेढ़ लाख शिक्षामित्र संविदा पर कार्यरत हैं, जो प्राथमिक स्कूलों में पढ़ाई की जिम्मेदारी संभालते हैं। लंबे समय से ये शिक्षक मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे थे। ऐसे में विधानसभा में हुआ यह ऐलान उनके लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।

सरकार का कहना है कि 1 अप्रैल से बढ़ा हुआ मानदेय सीधे शिक्षामित्रों के खातों में भेजा जाएगा। इस फैसले के बाद शिक्षामित्रों के बीच खुशी का माहौल है और कई संगठनों ने इसे सकारात्मक कदम बताया है।

कैशलेस इलाज और अनुदेशकों को भी राहत

सिर्फ मानदेय बढ़ाने तक ही यह फैसला सीमित नहीं रहा। मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि शिक्षामित्रों को अब 5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज भी मिलेगा। इसका मतलब है कि गंभीर बीमारी या इलाज की स्थिति में उन्हें आर्थिक संकट का सामना कम करना पड़ेगा। यह सुविधा राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजना के तहत दी जाएगी, जिससे संविदा कर्मियों को भी सुरक्षा का दायरा मिलेगा।

इसके साथ ही सरकार ने अनुदेशकों के लिए भी बड़ा फैसला लिया है। अब प्रदेश के करीब 28 हजार अनुदेशकों को 17,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलेगा। पहले उनका मानदेय इससे कम था। सीएम ने कहा कि अनुदेशकों के भुगतान में देरी नहीं होगी और तत्काल भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।

सरकार का दावा है कि यह कदम शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में कार्यरत शिक्षामित्र और अनुदेशक लंबे समय से आर्थिक असुरक्षा की स्थिति में काम कर रहे थे। ऐसे में यह निर्णय उनके मनोबल को बढ़ाने वाला माना जा रहा है।

विपक्ष का दबाव और चुनावी माहौल की चर्चा

हालांकि इस ऐलान को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा भी तेज हो गई है। कई लोग इसे आगामी विधानसभा चुनाव से जोड़कर देख रहे हैं। बजट सत्र के दौरान समाजवादी पार्टी समेत अन्य विपक्षी दलों ने शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कई मौकों पर सरकार को घेरते हुए सवाल किया था कि शिक्षामित्रों को सम्मानजनक मानदेय क्यों नहीं दिया जा रहा।

सदन में विधायक रागिनी सोनकर समेत कई विपक्षी नेताओं ने भी शिक्षामित्रों की समस्याओं को उठाया। उनका कहना था कि कम मानदेय में काम कर रहे शिक्षामित्रों के लिए गुजारा करना मुश्किल हो रहा है। इस पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधा और कहा कि पहले की सरकारों में शिक्षामित्रों को मात्र 3,000 रुपये मिलते थे, जिसे बढ़ाकर 10,000 रुपये उनकी सरकार ने किया और अब 18,000 रुपये तक पहुंचाया जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला निश्चित रूप से सरकार के लिए सकारात्मक संदेश देने वाला है। शिक्षामित्रों और उनके परिवारों की संख्या को देखते हुए यह वर्ग चुनावी नजरिए से भी अहम माना जाता है।

शिक्षा व्यवस्था पर असर और आगे की राह

मानदेय बढ़ोतरी और स्वास्थ्य सुविधा का सीधा असर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब शिक्षक आर्थिक रूप से सुरक्षित महसूस करते हैं तो उनका ध्यान पढ़ाई और छात्रों पर ज्यादा केंद्रित होता है। उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बड़ी संख्या में छात्र पढ़ते हैं, जिनकी बुनियादी शिक्षा की जिम्मेदारी शिक्षामित्रों पर भी होती है।

इस फैसले से शिक्षामित्रों में स्थिरता आएगी और उनके भविष्य को लेकर भरोसा मजबूत होगा। हालांकि कुछ संगठनों का कहना है कि अभी भी नियमितीकरण और स्थायी नियुक्ति जैसे मुद्दे बाकी हैं, जिन पर सरकार को आगे विचार करना चाहिए।

फिलहाल 1 अप्रैल से लागू होने जा रहे इस फैसले ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और राजनीतिक माहौल दोनों में हलचल पैदा कर दी है। सरकार इसे ऐतिहासिक कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे चुनावी रणनीति का हिस्सा मान रहा है। आने वाले समय में यह साफ होगा कि इस फैसले का असर सिर्फ वेतन तक सीमित रहता है या शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिलता है।

 

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