असम की राजनीति में चुनाव से पहले बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। राज्य के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने दावा किया है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेन बोरा 22 फरवरी को भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो सकते हैं। यह बयान सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई। क्योंकि भूपेन बोरा लंबे समय से Indian National Congress का प्रमुख चेहरा माने जाते रहे हैं और असम में पार्टी संगठन की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले कई बड़े चेहरे भाजपा का दामन थाम सकते हैं। हालांकि इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और ज्यादा गर्म हो गया है।
फैसले पर यू-टर्न की चर्चा
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा भूपेन बोरा के संभावित यू-टर्न को लेकर हो रही है। पहले ऐसी खबरें आई थीं कि वह कांग्रेस के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे और बीजेपी में शामिल होने की अटकलों को खारिज किया गया था। लेकिन अब मुख्यमंत्री के बयान ने इन अटकलों को फिर से हवा दे दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि असम में बदलते राजनीतिक समीकरण और आगामी चुनावी रणनीति के चलते कई नेता अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए नई राह तलाश रहे हैं। हालांकि भूपेन बोरा की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, जिससे स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है। कांग्रेस खेमे में भी इस बयान के बाद हलचल देखी जा रही है।
बीजेपी की चुनावी तैयारी और कांग्रेस की चुनौती
2026 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए Bharatiya Janata Party असम में अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पहले भी कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए थे और उसके बाद राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। ऐसे में अगर भूपेन बोरा भी बीजेपी में शामिल होते हैं तो यह कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जाएगा। असम में कांग्रेस पहले ही संगठनात्मक चुनौतियों से जूझ रही है और ऐसे में बड़े नेता का संभावित प्रस्थान पार्टी की स्थिति को और कमजोर कर सकता है। बीजेपी का दावा है कि वह विकास और स्थिर सरकार के मुद्दे पर चुनाव लड़ेगी, जबकि कांग्रेस सरकार की नीतियों को घेरने की तैयारी में है।
चुनाव 2026 से पहले बढ़ेगा सियासी तापमान
असम में जैसे-जैसे 2026 के चुनाव नजदीक आ रहे हैं, राजनीतिक गतिविधियां तेज होती जा रही हैं। नेताओं के दल बदल की खबरें और बयानबाजी चुनावी माहौल को और दिलचस्प बना रहे हैं। अगर 22 फरवरी को भूपेन बोरा वाकई बीजेपी में शामिल होते हैं तो यह राज्य की राजनीति में बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। वहीं यदि वह कांग्रेस में ही बने रहते हैं तो मुख्यमंत्री के बयान को लेकर नया विवाद खड़ा हो सकता है। फिलहाल पूरे राज्य की नजर इस संभावित राजनीतिक बदलाव पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी, लेकिन इतना तय है कि असम की राजनीति में चुनाव से पहले बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

