उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं। बरेली में UGC एक्ट के विरोध में इस्तीफा देकर सुर्खियों में आए पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अब खुलकर राजनीति में उतरने का फैसला किया है। शुक्रवार को मथुरा में आयोजित एक विशेष बैठक में उन्होंने अपनी नई राजनीतिक पार्टी के गठन का ऐलान कर दिया। यह बैठक राष्ट्रीय ब्राह्मण सेवा संघ (पंजी.) के तत्वाधान में परिक्रमा मार्ग स्थित गोपाल खार, श्री हरिदास धाम में आयोजित की गई थी। कार्यक्रम में स्थानीय लोगों ने उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया और बड़ी संख्या में लोग उनकी बात सुनने पहुंचे।
बैठक के दौरान अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि अब समय आ गया है कि सवर्ण समाज अपने अधिकारों और मुद्दों के लिए खुद राजनीतिक मंच तैयार करे। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि यह पार्टी केवल एक संगठन नहीं होगी, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक बदलाव की दिशा में एक आंदोलन की तरह काम करेगी। उनके इस ऐलान ने स्थानीय राजनीति में हलचल पैदा कर दी है और आने वाले दिनों में इसके असर को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
सरकार की नीतियों पर तीखा प्रहार
अपने संबोधन में अलंकार अग्निहोत्री ने सरकार की नीतियों पर खुलकर सवाल उठाए। उन्होंने मुख्य रूप से तीन मुद्दों – एससी/एसटी एक्ट, UGC एक्ट और बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर – पर अपनी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि इन कानूनों और योजनाओं से समाज के एक वर्ग के साथ अन्याय हो रहा है। उन्होंने UGC एक्ट को लेकर कहा कि यदि इस कानून को वापस नहीं लिया गया, तो जनता आगामी चुनावों में इसका जवाब देगी।
उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा सरकार खुद को सनातन की हितैषी बताती है, लेकिन जमीनी स्तर पर फैसले इसके विपरीत नजर आते हैं। उनके अनुसार, लोकतंत्र की मूल भावना कमजोर हो रही है और फैसले आम लोगों की राय के बजाय कुछ चुनिंदा लोगों के हित में लिए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि जिस तरह भाजपा को अयोध्या में नुकसान हुआ, उसी तरह आने वाले समय में काशी, मथुरा और वृंदावन में भी राजनीतिक तस्वीर बदल सकती है।
बांके बिहारी कॉरिडोर पर विरोध
अलंकार अग्निहोत्री ने विशेष रूप से बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर परियोजना का विरोध किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों की मूल संरचना और परंपराओं के साथ छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए। उनके अनुसार, कॉरिडोर के नाम पर स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की भावनाओं की अनदेखी हो रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार विकास के नाम पर ऐसे फैसले ले रही है जिनसे सांस्कृतिक पहचान को नुकसान पहुंच सकता है।
उन्होंने भाजपा नेताओं पर भी निशाना साधते हुए कहा कि कई जनप्रतिनिधि टिकट कटने के डर से जनता के मुद्दों पर खुलकर बोलने से बच रहे हैं। उनका कहना था कि यदि सरकार ने इन मुद्दों पर पुनर्विचार नहीं किया, तो सवर्ण समाज राजनीतिक विकल्प के रूप में नई पार्टी को मजबूत करेगा। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आगामी चुनावों में यह नई पार्टी किस तरह समीकरण बदल सकती है।
नई पार्टी का खाका तैयार, जल्द होगी औपचारिक घोषणा
बैठक के अंत में अलंकार अग्निहोत्री ने घोषणा की कि जल्द ही नई राजनीतिक पार्टी का औपचारिक गठन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी का उद्देश्य किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने अधिकारों और समाज के संतुलित विकास के लिए होगा। पार्टी की संरचना, पदाधिकारियों की नियुक्ति और संगठन विस्तार की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में जनसभाएं आयोजित कर लोगों से सुझाव लिए जाएंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति पहले से ही जातीय और सामाजिक समीकरणों पर आधारित रही है। ऐसे में यदि सवर्ण समाज के नाम पर कोई नया राजनीतिक दल सक्रिय होता है, तो इसका असर आगामी चुनावों पर पड़ सकता है। हालांकि अभी यह देखना बाकी है कि इस नई पार्टी को कितना जनसमर्थन मिलता है और यह प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था में कितनी जगह बना पाती है। फिलहाल, अलंकार अग्निहोत्री के इस ऐलान ने प्रदेश की सियासत में नई चर्चा को जन्म दे दिया है।

