पप्पू यादव की गिरफ्तारी के बाद बिहार की राजनीति में एक बार फिर तेज हलचल देखने को मिल रही है। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को 31 साल पुराने एक मामले में पटना पुलिस ने 6 फरवरी 2026 की देर रात गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी की खबर सामने आते ही समर्थकों और विपक्षी दलों में नाराजगी दिखी, वहीं सत्तापक्ष की ओर से इसे कानून के दायरे में की गई कार्रवाई बताया गया। इसी बीच केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान का बयान सामने आया, जिसने इस पूरे मामले को और ज्यादा चर्चा में ला दिया। हाजीपुर पहुंचे चिराग पासवान ने साफ शब्दों में कहा कि अगर किसी के कर्म सही हैं तो उसे डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने देश की न्याय प्रक्रिया पर भरोसा रखने की अपील की और कहा कि कानून अपना काम कर रहा है।
“बिना सबूत के कोई कार्रवाई नहीं होती” – चिराग पासवान
चिराग पासवान ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि किसी भी सांसद या बड़े नेता के खिलाफ बिना ठोस आधार के गिरफ्तारी नहीं की जाती। उनके मुताबिक जांच एजेंसियों के पास जरूर ऐसे तथ्य और सबूत होंगे, जिनके आधार पर यह कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा, “अगर आपने कोई गलत काम नहीं किया है तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर गुनाह किया है, तो कानून अपना रास्ता खुद तय करता है।” चिराग ने यह भी कहा कि गिरफ्तारी के वक्त जिस तरह का भय का माहौल बनाया गया, वह सही नहीं था और सहयोग का रास्ता अपनाया जाना चाहिए था। उनके बयान को सत्तापक्ष की ओर से कानून व्यवस्था का समर्थन माना जा रहा है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक दबाव से जोड़कर देख रहा है।
विपक्ष पर निशाना, ‘बदले की राजनीति’ के आरोप खारिज
इस पूरे मामले में चिराग पासवान ने कांग्रेस और आरजेडी पर भी सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि हर कानूनी कार्रवाई को ‘बदले की राजनीति’ बताना विपक्ष की पुरानी आदत बन चुकी है। चिराग के अनुसार, यह गिरफ्तारी किसी राजनीतिक साजिश का हिस्सा नहीं बल्कि कानून के पालन का उदाहरण है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि एनडीए सरकार में किसी निर्दोष को नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा, लेकिन जो दोषी पाया जाएगा, उसे बख्शा भी नहीं जाएगा। चिराग का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब विपक्ष पप्पू यादव की गिरफ्तारी को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रहा है और सरकार पर जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगा रहा है।
31 साल पुराना मामला, कोर्ट और आगे की राह
जानकारी के मुताबिक पप्पू यादव की गिरफ्तारी 31 साल पुराने एक मामले से जुड़ी है, जिसमें धोखाधड़ी (420), जालसाजी (468) और आपराधिक साजिश (120B) जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। शनिवार 7 फरवरी 2026 को उन्हें पटना की एमपी-एमएलए कोर्ट में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उन्हें दो दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। गिरफ्तारी के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने की खबर सामने आई, जिसके बाद उन्हें पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) में भर्ती कराया गया। अब उनकी जमानत याचिका पर सोमवार 9 फरवरी 2026 को सुनवाई होने की संभावना है। इस बीच पप्पू यादव की गिरफ्तारी और उस पर चिराग पासवान के बयान ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है, जहां एक तरफ कानून और न्याय की बात हो रही है, तो दूसरी ओर राजनीतिक मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।
