उत्तर प्रदेश के वृंदावन में उस समय लोग हैरान रह गए, जब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार बिल्कुल आम श्रद्धालु की तरह नजर आए। न कोई सरकारी काफिला, न सुरक्षा घेरे की चकाचौंध और न ही कोई विशेष प्रोटोकॉल। निशांत कुमार साधारण कपड़ों में वृंदावन की संकरी कुंज गलियों में पैदल चलते दिखे। उन्होंने किसी वीआईपी सुविधा का इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि ई-रिक्शा से यात्रा करते हुए यमुना के जुगल घाट पहुंचे। वहां उन्होंने विधिवत यमुना पूजन किया और कुछ समय तक घाट पर शांति से बैठे रहे। आसपास मौजूद श्रद्धालुओं को शुरू में यह अहसास भी नहीं हुआ कि वे किसी बड़े राजनीतिक परिवार से जुड़े हैं। उनकी सादगी और शांत स्वभाव ने लोगों का ध्यान खींचा और यही वजह रही कि यह दौरा चर्चा का विषय बन गया।
ई-रिक्शा से इस्कॉन मंदिर, आम भक्तों की तरह किए दर्शन
यमुना पूजन के बाद निशांत कुमार ई-रिक्शा से ही वृंदावन स्थित इस्कॉन मंदिर पहुंचे। मंदिर परिसर में भी उन्होंने किसी तरह की विशेष व्यवस्था नहीं ली। वह आम श्रद्धालुओं की कतार में खड़े होकर ठाकुरजी के दर्शन करते नजर आए। मंदिर में चल रहे हरे राम-हरे कृष्ण संकीर्तन में भी उन्होंने भाग लिया और काफी देर तक भक्ति संगीत का आनंद लिया। इस्कॉन मंदिर के पीआरओ रविलोचन दास ने बताया कि निशांत कुमार पूरी विनम्रता और श्रद्धा के साथ दर्शन करने आए थे। उन्होंने मंदिर के नियमों का पालन करते हुए ठाकुरजी के दर्शन किए। दर्शन के बाद उन्हें ठाकुरजी की प्रसादी माला और प्रसाद भी भेंट किया गया। मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं ने भी उनके व्यवहार की सराहना की और कहा कि बड़े पद पर बैठे व्यक्ति के बेटे में ऐसी सादगी कम ही देखने को मिलती है।
सीएम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार अपनी सादगी के लिए जाने जाते हैं। अभी वह वृंदावन में है। जहां वो ई-रिक्शा में घूमते दिखे। pic.twitter.com/dxZMMUeAxY
— Anand shekhar (@shekharanand76) February 4, 2026
सॉफ्टवेयर इंजीनियर से आध्यात्मिक जीवन तक का सफर
निशांत कुमार पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और राजनीति से अब तक दूरी बनाए हुए हैं। वह अपना अधिकांश समय निजी जीवन, तकनीकी काम और आध्यात्मिक गतिविधियों में बिताना पसंद करते हैं। सार्वजनिक मंचों से दूर रहने वाले निशांत कुमार को अक्सर धार्मिक स्थलों पर देखा जाता है। वृंदावन दौरा भी उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है, जहां वह शांति और आत्मिक संतुलन की तलाश में पहुंचे। उनके करीबी बताते हैं कि निशांत कुमार को भीड़-भाड़ और दिखावे से दूर रहना पसंद है। यही कारण है कि उन्होंने वृंदावन यात्रा के दौरान किसी तरह की सरकारी सुविधा नहीं ली। उनके इस व्यवहार ने लोगों के बीच यह संदेश भी दिया कि सत्ता और सादगी साथ-साथ चल सकती है।
राजनीति में एंट्री की अटकलें तेज, जेडीयू में हलचल
निशांत कुमार के इस दौरे के बीच राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि होली के बाद वह सक्रिय राजनीति में कदम रख सकते हैं। जनता दल यूनाइटेड के भीतर इसे लेकर तैयारियां शुरू होने की खबरें सामने आ रही हैं। मार्च महीने में जेडीयू के नए अध्यक्ष का चुनाव प्रस्तावित है और फिलहाल पार्टी की कमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हाथ में है। ऐसे में निशांत कुमार की बढ़ती सार्वजनिक मौजूदगी को भविष्य की भूमिका से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इस बारे में कोई बयान सामने नहीं आया है। वृंदावन यात्रा को कुछ लोग केवल एक निजी और आध्यात्मिक दौरा मान रहे हैं, तो कुछ इसे राजनीति में प्रवेश से पहले का संकेत बता रहे हैं। सादगी, संयम और बिना तामझाम के सामने आना निशांत कुमार की पहचान बनता दिख रहा है, और यही वजह है कि उनका यह अंदाज आने वाले समय में और भी चर्चा में रह सकता है।
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