बुधवार को संसद भवन परिसर में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने राजनीति से लेकर सोशल मीडिया तक हलचल मचा दी। कांग्रेस सांसद शशि थरूर संसद की सीढ़ियों से उतरते समय फोन पर बात कर रहे थे, तभी उनका संतुलन बिगड़ गया और वे लड़खड़ा गए। यह सब कुछ अचानक हुआ, लेकिन सौभाग्य से उनके पास ही समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव खड़े थे। जैसे ही थरूर फिसले, अखिलेश यादव ने तुरंत उनका हाथ पकड़कर उन्हें संभाल लिया। कुछ ही सेकंड का यह घटनाक्रम वहां मौजूद कैमरों में कैद हो गया और देखते-देखते वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में साफ दिख रहा है कि अखिलेश यादव न सिर्फ थरूर को गिरने से बचाते हैं, बल्कि कुछ सीढ़ियां उतरते समय उनका हाथ थामे भी रहते हैं। संसद परिसर में मौजूद अन्य सांसद भी कुछ पल के लिए रुक गए और थरूर का हालचाल पूछते नजर आए। इस दृश्य ने एक मानवीय पल तो दिखाया ही, साथ ही सियासी हलकों में कई तरह की चर्चाओं को भी जन्म दे दिया।
“मैं ठीक हूं”, शशि थरूर ने खुद दिया जवाब
वीडियो वायरल होने के बाद कई लोगों ने शशि थरूर के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई। सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे कि कहीं उन्हें चोट तो नहीं लगी। इन तमाम अटकलों के बीच खुद शशि थरूर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर सामने आकर स्थिति साफ कर दी। उन्होंने वही वीडियो साझा करते हुए लिखा, “जिस दीए को तूफां में जलना होगा, उसे संभल-संभल के चलना होगा. मैं ठीक हूं।” थरूर के इस बयान ने लोगों को राहत तो दी, लेकिन इसके साथ ही सियासी गलियारों में नए अर्थ भी निकाले जाने लगे। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि थरूर का यह कथन केवल एक सामान्य प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि इसके जरिए वे मौजूदा राजनीतिक हालात और अपनी भूमिका की ओर भी संकेत कर रहे हैं। समर्थकों ने इसे उनके आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच का प्रतीक बताया, वहीं विरोधियों ने इसे राजनीतिक संदेश के रूप में देखा। हालांकि, थरूर की ओर से साफ कर दिया गया कि वे पूरी तरह स्वस्थ हैं और यह एक मामूली फिसलन भर थी।
राहुल गांधी और रवनीत सिंह बिट्टू की नोकझोंक
शशि थरूर के वीडियो के साथ-साथ संसद भवन में उसी दिन एक और घटनाक्रम ने सुर्खियां बटोरीं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। संसद परिसर में हुई इस बहस के दौरान राहुल गांधी ने बिट्टू को लेकर कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया, जिससे माहौल और गर्म हो गया। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी ने बातचीत के दौरान बिट्टू को “गद्दार” कहा। हालांकि, बाद में राहुल गांधी ने माहौल को सामान्य करने के लिए हाथ मिलाने की कोशिश भी की, लेकिन रवनीत सिंह बिट्टू बिना हाथ मिलाए वहां से चले गए। इस पूरी घटना ने राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच पहले से चल रहे तनाव में यह एक और कड़ी बन गया। संसद परिसर में मौजूद सांसदों और मीडियाकर्मियों के बीच यह चर्चा का बड़ा विषय बन गया कि आखिर बातचीत इतनी तीखी क्यों हो गई।
Thank you @yadavakhilesh-ji! Your prompt, helpful hand, and concern for Dr @ShashiTharoor are heartwarming!pic.twitter.com/NAF69W9E8k
— Bharat Tiwari (@BharatTiwari) February 4, 2026
भाजपा का पलटवार, सिख समुदाय की अस्मिता का मुद्दा उठा
रवनीत सिंह बिट्टू को “गद्दार” कहे जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। दिल्ली से भाजपा के सात सांसदों ने इस बयान को निंदनीय बताया और कहा कि इससे सिख समुदाय की अस्मिता पर सीधा प्रहार हुआ है। भाजपा नेताओं का कहना है कि एक केंद्रीय मंत्री के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना न सिर्फ संसदीय मर्यादाओं के खिलाफ है, बल्कि यह समाज के एक बड़े वर्ग की भावनाओं को भी आहत करता है। पार्टी ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए राहुल गांधी से माफी की मांग की है। वहीं, कांग्रेस की ओर से कहा जा रहा है कि पूरे मामले को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। इस तरह, एक तरफ शशि थरूर के लड़खड़ाने का वीडियो मानवीय संवेदनाओं और सियासी संकेतों का विषय बना, तो दूसरी तरफ राहुल गांधी और रवनीत सिंह बिट्टू की नोकझोंक ने संसद की राजनीति को और गरमा दिया। इन दोनों घटनाओं ने यह साफ कर दिया कि संसद का यह सत्र न सिर्फ कानून और नीतियों, बल्कि तीखे राजनीतिक संदेशों और प्रतीकों से भी भरा हुआ है।
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