बजट 2026 के बाद सिगरेट पीने वालों को बड़ा झटका लगा है। जो सिगरेट अब तक 10 रुपये में आसानी से मिल जाती थी, उसकी कीमतें सीधे दोगुनी से ज्यादा हो गई हैं। नए टैक्स सिस्टम के लागू होने के बाद ज्यादातर लोकल और मिड-सेगमेंट ब्रांड्स की सिगरेट अब 20 से 25 रुपये में बिकने की तैयारी में हैं। सरकार का साफ कहना है कि तंबाकू उत्पादों पर टैक्स बढ़ाना एक जरूरी कदम था, ताकि लोगों को स्मोकिंग से दूर किया जा सके। बजट में सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों को लेकर जो बदलाव किए गए हैं, उनका सीधा असर आम उपभोक्ता की जेब पर पड़ रहा है। सात साल बाद इतनी बड़ी टैक्स बढ़ोतरी देखने को मिली है, जिससे यह साफ हो गया है कि सरकार अब तंबाकू को सस्ता नहीं रहने देना चाहती।
नया टैक्स सिस्टम क्या है और जीएसटी कम्पनसेशन क्यों हटाया गया?
सरकार ने बजट 2026 में सिगरेट और तंबाकू उत्पादों के लिए एक नया टैक्स सिस्टम पेश किया है, जो जुलाई 2017 से लागू जीएसटी कम्पनसेशन सेस की जगह लेगा। यह नया सिस्टम संसद की मंजूरी के बाद लागू किया गया है, जिसकी तैयारी दिसंबर में ही पूरी कर ली गई थी। सरकार का कहना है कि पुराना सिस्टम अब स्वास्थ्य और राजस्व दोनों नजरिए से प्रभावी नहीं रहा था। नए ढांचे में टैक्स को इस तरह डिजाइन किया गया है कि सस्ती सिगरेट पर ज्यादा असर पड़े, ताकि कम आय वर्ग के लोग स्मोकिंग छोड़ने के लिए प्रेरित हों। सरकार का यह भी तर्क है कि भारत को अब तंबाकू टैक्स के मामले में वैश्विक स्वास्थ्य मानकों के करीब लाना जरूरी हो गया था।
₹10 से ₹25 तक का सफर: किस सिगरेट की कीमत कितनी बढ़ेगी?
नई दरों के बाद बाजार में कीमतों का गणित पूरी तरह बदल गया है। जिन सिगरेट्स की कीमत पहले 10 रुपये थी, वे अब कम से कम 20 से 25 रुपये में मिलेंगी। वहीं 76 एमएम साइज की सिगरेट का एक पैक अब 50 से 55 रुपये तक पहुंच सकता है, हालांकि यह पूरी तरह ब्रांड और कंपनी की प्राइसिंग रणनीति पर निर्भर करेगा। प्रीमियम सेगमेंट की सिगरेट्स पर टैक्स का असर और ज्यादा दिखेगा, जिससे उनकी कीमतों में भी बड़ा उछाल आने की संभावना है। कंपनियां अब नए टैक्स के हिसाब से अपने दाम रिवाइज कर रही हैं और आने वाले दिनों में अलग-अलग ब्रांड्स की नई कीमतें बाजार में देखने को मिलेंगी।
सरकार की रणनीति: राजस्व बढ़ेगा या स्मोकिंग घटेगी?i
सरकार का मानना है कि सिगरेट पर टैक्स बढ़ाने से दो बड़े फायदे होंगे। पहला, सरकारी खजाने में अतिरिक्त राजस्व आएगा और दूसरा, स्मोकिंग की आदत पर लगाम लगेगी। स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी मानते हैं कि जब तंबाकू उत्पाद महंगे होते हैं, तो खासकर युवा वर्ग और पहली बार स्मोकिंग शुरू करने वाले लोग इससे दूर रहते हैं। बजट 2026 में उठाया गया यह कदम सरकार की लंबी अवधि की स्वास्थ्य नीति का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, यह भी देखना दिलचस्प होगा कि कीमतें बढ़ने के बाद उपभोक्ताओं का व्यवहार कितना बदलता है और क्या सच में स्मोकिंग की दर में कमी आती है या नहीं।
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