Hem Singh Bhadana Death News: राजस्थान की राजनीति के लिए सोमवार की सुबह बेहद दुखद खबर लेकर आई। पूर्व कैबिनेट मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हेम सिंह भड़ाना का अचानक निधन हो गया। बताया जा रहा है कि आज सुबह उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद परिजन उन्हें तुरंत एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। हालांकि डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके निधन की खबर फैलते ही राजस्थान के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई। बीजेपी कार्यकर्ताओं से लेकर आम लोग तक इस खबर से गहरे सदमे में हैं। पार्टी के अलवर जिला मीडिया प्रभारी ने जानकारी दी कि पूर्व मंत्री के निधन के चलते आज पार्टी के सभी निर्धारित कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं। हेम सिंह भड़ाना का अंतिम संस्कार दोपहर 12 बजे उनके पैतृक गांव किशनगढ़ बास के भगेरी कला में पूरे सम्मान के साथ किया जाएगा, जहां बड़ी संख्या में समर्थकों और राजनीतिक हस्तियों के पहुंचने की संभावना है।
छात्र राजनीति से मंत्री पद तक का सफर
हेम सिंह भड़ाना का राजनीतिक जीवन संघर्ष, मेहनत और जमीन से जुड़े नेतृत्व का उदाहरण माना जाता है। उन्होंने अपने सियासी सफर की शुरुआत छात्र राजनीति से की थी। युवावस्था में ही वे सामाजिक मुद्दों और जनसमस्याओं को लेकर सक्रिय हो गए थे। धीरे-धीरे जनता के बीच उनकी मजबूत पकड़ बनती चली गई। इसी का नतीजा रहा कि वे दो बार विधायक चुने गए। वर्ष 2013 में जब वसुंधरा राजे के नेतृत्व में राजस्थान में बीजेपी की सरकार बनी, तब हेम सिंह भड़ाना को कैबिनेट मंत्री बनाया गया। मंत्री रहते हुए उन्होंने अपने क्षेत्र के विकास, सड़क, बिजली, पानी और शिक्षा जैसे बुनियादी मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया। पार्टी के भीतर उन्हें एक साफ-सुथरी छवि वाले और संगठन के प्रति समर्पित नेता के रूप में जाना जाता था। उनका व्यवहार सरल था और वे आमजन से सीधे संवाद में विश्वास रखते थे, यही कारण रहा कि वे लंबे समय तक जनता के बीच लोकप्रिय बने रहे।
बीमारी के बावजूद जनता से जुड़ाव नहीं टूटा
पिछले पांच से छह महीनों से हेम सिंह भड़ाना गंभीर रूप से बीमार चल रहे थे। इसके बावजूद उन्होंने खुद को घर तक सीमित नहीं रखा। वे लगातार लोगों से मिलते रहे और जनसमस्याओं को सुनते रहे। उनका मानना था कि राजनीति का असली मकसद जनता की सेवा है, और आखिरी सांस तक वे इसी सोच पर कायम रहे। पिछले विधानसभा चुनाव में वे बहुत कम अंतर से हार गए थे, लेकिन हार के बाद भी उनका जनसंपर्क कमजोर नहीं पड़ा। क्षेत्र के लोग आज भी उन्हें एक सुलभ और संवेदनशील नेता के रूप में याद करते हैं। उनके अचानक निधन से न केवल बीजेपी बल्कि राजस्थान की राजनीति को भी एक बड़ा नुकसान हुआ है। उनके समर्थकों और शुभचिंतकों के लिए यह विश्वास करना मुश्किल हो रहा है कि वे अब उनके बीच नहीं रहे।
मुख्यमंत्री और विपक्षी नेताओं ने जताया गहरा दुख
हेम सिंह भड़ाना के निधन पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री का जाना प्रदेश के लिए अपूरणीय क्षति है। मुख्यमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा कि भड़ाना ने हमेशा जनहित और प्रदेश के विकास को प्राथमिकता दी और उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। वहीं, नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता टीकाराम जूली ने भी उनके निधन को अत्यंत दुखद बताया। उन्होंने कहा कि इस दुख की घड़ी में उनकी संवेदनाएं शोकाकुल परिवार के साथ हैं। बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दलों के नेताओं द्वारा शोक जताया जाना इस बात का संकेत है कि हेम सिंह भड़ाना एक ऐसे नेता थे, जिनका सम्मान दलगत राजनीति से ऊपर था। उनके निधन से राजस्थान की राजनीति में एक ऐसा खालीपन पैदा हो गया है, जिसे भर पाना आसान नहीं होगा।
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