अयोध्या से जुड़ा एक प्रशासनिक मामला बीते कुछ दिनों से लगातार सुर्खियों में बना हुआ था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में अयोध्या के जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार द्वारा दिया गया इस्तीफा न सिर्फ विभागीय गलियारों में, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया था। 27 जनवरी को उन्होंने अचानक अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की थी और इसके पीछे उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति समर्थन और निष्ठा को कारण बताया था। यह फैसला इसलिए भी चौंकाने वाला था क्योंकि एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी का इस तरह सार्वजनिक रूप से इस्तीफा देना आम बात नहीं मानी जाती। उस समय यह माना जा रहा था कि उनका यह कदम किसी बड़े राजनीतिक या प्रशासनिक संदेश से जुड़ा हो सकता है। सोशल मीडिया पर भी इस इस्तीफे को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं और लोग इसके मायने तलाशने में जुट गए थे।
इस्तीफे के बाद बढ़ी हलचल, विभागीय स्तर पर शुरू हुई मंथन प्रक्रिया
प्रशांत कुमार के इस्तीफे के बाद जीएसटी विभाग में भी हलचल तेज हो गई थी। अधिकारियों के बीच इस बात पर चर्चा शुरू हो गई कि आखिर एक जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी ने ऐसा कदम क्यों उठाया। बताया जा रहा है कि इस्तीफा दिए जाने के बाद उच्च स्तर पर इस पूरे मामले की समीक्षा की गई। विभागीय अधिकारियों ने प्रशांत कुमार से बातचीत की और उनके फैसले के पीछे की मंशा को समझने की कोशिश की। इसी दौरान यह भी स्पष्ट हुआ कि यह इस्तीफा किसी दबाव या विभागीय विवाद का नतीजा नहीं था, बल्कि पूरी तरह उनका व्यक्तिगत निर्णय था। हालांकि, प्रशासनिक व्यवस्था को देखते हुए इस तरह के फैसले के दूरगामी प्रभावों पर भी विचार किया गया। माना जा रहा है कि इसी मंथन के दौरान प्रशांत कुमार को अपने फैसले पर दोबारा सोचने का अवसर मिला और उन्होंने इस्तीफा वापस लेने की दिशा में कदम बढ़ाया।
इस्तीफा वापस लेकर दोबारा ज्वाइन की ड्यूटी
सभी अटकलों पर उस समय विराम लग गया जब प्रशांत कुमार ने आधिकारिक रूप से अपना इस्तीफा वापस ले लिया और पुनः अपने पद पर ज्वाइन कर लिया। उनके ड्यूटी ज्वाइन करते ही यह स्पष्ट हो गया कि मामला अब पूरी तरह सुलझ चुका है। जीएसटी विभाग की ओर से भी यह संकेत दिया गया कि प्रशांत कुमार पहले की तरह अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे। इस घटनाक्रम ने यह दिखाया कि प्रशासनिक सेवा में भावनाओं के साथ-साथ संस्थागत जिम्मेदारियों का संतुलन कितना जरूरी होता है। इस्तीफा वापस लेने के बाद प्रशांत कुमार की ओर से किसी तरह का सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया, लेकिन सूत्रों का कहना है कि उन्होंने अपने फैसले को लेकर आत्ममंथन किया और विभागीय हितों को प्राथमिकता दी। इससे पहले जिस सस्पेंस ने पूरे मामले को हवा दी थी, वह अब पूरी तरह समाप्त हो गया है।
प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में मामले के मायने, आगे क्या संदेश?
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में अलग-अलग तरह से देखा जा रहा है। कुछ लोग इसे व्यक्तिगत भावनाओं से जुड़ा मामला मान रहे हैं, तो कुछ इसे प्रशासनिक मर्यादा और जिम्मेदारी का उदाहरण बता रहे हैं। एक ओर जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में दिया गया इस्तीफा चर्चा में रहा, वहीं दूसरी ओर उसका वापस लिया जाना यह संदेश भी देता है कि प्रशासनिक सेवा में निर्णय लेते समय व्यापक असर को ध्यान में रखना जरूरी होता है। अयोध्या जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण जिले में तैनात अधिकारी की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। ऐसे में प्रशांत कुमार का दोबारा जिम्मेदारी संभालना विभाग के लिए राहत की बात है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में यह मामला एक उदाहरण के तौर पर देखा जाएगा, जिसमें भावनात्मक फैसले और प्रशासनिक संतुलन के बीच का फर्क साफ नजर आता है। फिलहाल, अयोध्या के जीएसटी विभाग में कामकाज सामान्य रूप से जारी है और यह पूरा मामला अब एक अध्याय के रूप में दर्ज हो चुका है।
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