महाराष्ट्र की राजनीति ने एक ऐसा पल देखा, जिसमें शोक, जिम्मेदारी और सत्ता—तीनों एक साथ सामने आए। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दिवंगत कद्दावर नेता अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद पूरे राज्य में शोक की लहर है। खासकर बारामती, जो वर्षों से पवार परिवार का राजनीतिक गढ़ रहा है, वहां भावनात्मक माहौल देखने को मिला। इसी बीच एक बड़ा राजनीतिक फैसला सामने आया—अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। यह सिर्फ एक संवैधानिक प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि एक भावनात्मक और राजनीतिक संदेश भी था। शनिवार को एनसीपी की अहम बैठक में सुनेत्रा पवार को विधायक दल का नेता चुना गया, जिसके बाद उन्हें डिप्टी सीएम पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। यह फैसला ऐसे समय पर आया है, जब पार्टी को नेतृत्व की मजबूती और स्थिरता की सबसे ज्यादा जरूरत है।
पहली महिला डिप्टी सीएम – इतिहास में दर्ज हुआ नाम
सुनेत्रा पवार के शपथ ग्रहण के साथ ही महाराष्ट्र के राजनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया। वह राज्य की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बनी हैं। यह उपलब्धि सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है। शपथ लेने के बाद सुनेत्रा पवार ने बेहद संयमित और भावुक अंदाज में अपनी पहली प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की जनता और पार्टी के सहयोगियों ने उन पर जो भरोसा जताया है, वह उसे पूरी ईमानदारी और क्षमता के साथ निभाएंगी। उनके शब्दों में आत्मविश्वास था, लेकिन साथ ही अजित पवार के जाने का दर्द भी साफ झलक रहा था। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह नियुक्ति एनसीपी को भावनात्मक रूप से जोड़ने और संगठन को टूटने से बचाने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकती है।
विपक्ष से समर्थन, सत्ता पक्ष से संकेत
सुनेत्रा पवार के डिप्टी सीएम बनने पर देशभर से बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर उन्हें शुभकामनाएं दीं। उन्होंने लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में महाराष्ट्र की विकास यात्रा को सुनेत्रा पवार नई गति देंगी। यह संदेश सिर्फ औपचारिक बधाई नहीं माना जा रहा, बल्कि इसके राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। सत्ता पक्ष और सहयोगी दलों की ओर से भी सकारात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि सुनेत्रा पवार को शुरुआती दौर में राजनीतिक समर्थन मिल सकता है। वहीं, विपक्ष भी फिलहाल संयम बरतता नजर आ रहा है, क्योंकि मामला एक शोकाकुल परिवार और संवेदनशील राजनीतिक संक्रमण से जुड़ा है।
क्या सुनेत्रा पवार संभाल पाएंगी अजित पवार की राजनीतिक विरासत?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सुनेत्रा पवार अजित पवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा पाएंगी? अजित पवार को एक तेज फैसले लेने वाले, जमीनी नेता के रूप में जाना जाता था। ऐसे में उनकी अनुपस्थिति में पार्टी और सरकार—दोनों स्तरों पर संतुलन बनाए रखना आसान नहीं होगा। सुनेत्रा पवार के सामने प्रशासनिक अनुभव की कमी को लेकर सवाल जरूर उठ रहे हैं, लेकिन पार्टी नेतृत्व का मानना है कि उनके साथ अनुभवी नेताओं की टीम रहेगी। आने वाले समय में यह साफ होगा कि वह सिर्फ सहानुभूति के आधार पर आई नेता हैं या मजबूत फैसले लेने वाली प्रशासक भी बनेंगी। फिलहाल महाराष्ट्र की राजनीति उन्हें एक मौके के रूप में देख रही है—एक ऐसी नेता के रूप में, जो दुख से उठकर राज्य के विकास की जिम्मेदारी संभालने का दावा कर रही हैं।

