वैशाली जिले के गरौल थाना क्षेत्र के सोनधो मुबारकपुर मांझी टोला में 91 साल की झपकी देवी का निधन हो गया। परिजन उन्हें श्मशान घाट लेकर गए, लेकिन रास्ते में उन्हें रोक दिया गया। परिवार का कहना है कि स्थानीय दुकानदारों ने रास्ते पर अतिक्रमण कर रखा था। काफी विनती और बातचीत के बाद भी रास्ता नहीं खुला। मजबूरी में परिवार ने बीच सड़क पर ही चिता सजाई और बुजुर्ग महिला का अंतिम संस्कार कर दिया। झपकी देवी के बेटे सन्देश माझी ने कहा, “हमारे पास कोई विकल्प नहीं था। मजबूरी में सड़क पर ही अंतिम संस्कार करना पड़ा।”
अतिक्रमण और प्रशासन की निष्क्रियता
परिवार और स्थानीय लोगों का कहना है कि यह रास्ता लंबे समय से बंद है। कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। दुकानदार शंकर ठाकुर ने कहा, “पहले रास्ता था, अब नहीं है। पुलिस भी मौके पर आई लेकिन कुछ नहीं किया।” यह घटना प्रशासन की लापरवाही और अतिक्रमण की गंभीर समस्या को सामने ला रही है।
प्रशासन ने की जांच शुरू
घटना के बाद वैशाली की डीएम वर्षा सिंह ने मामला गंभीरता से लिया। उन्होंने उच्चस्तरीय जांच समिति बनाई है। इसमें महुआ के SDO, DSP और गरौल के BDO शामिल हैं। समिति यह जांच करेगी कि सड़क क्यों बंद थी और अंतिम संस्कार के समय प्रशासन क्यों सक्रिय नहीं था। डीएम ने कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय जनप्रतिनिधि रूबी देवी ने कहा कि सभी पक्ष मिलकर स्थायी समाधान निकालेंगे ताकि भविष्य में कोई और परिवार ऐसी समस्या का सामना न करे।
समाज और प्रशासन के लिए संदेश
यह घटना समाज में दलित समुदाय के अधिकार और सम्मान पर सवाल खड़ा करती है। सड़क पर अंतिम संस्कार की तस्वीरें बहुत दुखद हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशासन को रास्तों की सुरक्षा और अतिक्रमण हटाने में तेजी लानी चाहिए। साथ ही, सभी परिवारों को उनके अंतिम संस्कार का अधिकार सुरक्षित होना चाहिए। यह घटना पूरे जिले में एक चेतावनी भी है कि कानून और व्यवस्था के साथ मानवता का सम्मान भी जरूरी है।
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