आज की डिजिटल दुनिया में Google Search, इंटरनेट और AI हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। पढ़ाई, नौकरी, बैंकिंग, इलाज से लेकर मनोरंजन तक हर काम के लिए लोग गूगल का सहारा लेते हैं। लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि इंटरनेट पर की गई हर सर्च पूरी तरह निजी नहीं होती। आपकी हर ऑनलाइन गतिविधि का एक डिजिटल रिकॉर्ड बनता है, जिसे जरूरत पड़ने पर जांच एजेंसियां ट्रैक कर सकती हैं।
भारत में IT एक्ट, IPC और UAPA जैसे कानून ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखते हैं। अगर कोई व्यक्ति संदिग्ध या गैरकानूनी विषय से जुड़ी जानकारी सर्च करता है, तो वह अनजाने में भी शक के घेरे में आ सकता है। कई मामलों में देखा गया है कि सिर्फ गलत जानकारी खोजने पर ही पूछताछ शुरू हो गई। भले ही व्यक्ति का इरादा गलत न हो, लेकिन कुछ शब्द या टॉपिक ऐसे हैं जिनकी Google Search आपको बड़ी परेशानी में डाल सकती है। इसलिए इंटरनेट इस्तेमाल करते समय सतर्क रहना बेहद जरूरी हो गया है।
आतंकवाद और बच्चों से जुड़े कंटेंट की सर्च सबसे खतरनाक
कुछ विषय ऐसे हैं जिनसे जुड़ी जानकारी सर्च करना सीधे गंभीर कानूनी कार्रवाई को न्योता दे सकता है। आतंकवादी संगठनों के नाम, उनकी विचारधारा, भर्ती प्रक्रिया, ट्रेनिंग या प्रचार से जुड़ी किसी भी तरह की Google Search बेहद खतरनाक मानी जाती है। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियां तुरंत सतर्क हो जाती हैं और UAPA जैसे सख्त कानून लग सकते हैं।
इसी तरह बच्चों के शोषण, अश्लील कंटेंट, वीडियो या फोटो से जुड़ी किसी भी तरह की खोज गंभीर अपराध की श्रेणी में आती है। भारत में इस तरह के मामलों में कोई ढील नहीं दी जाती, चाहे सर्च गलती से ही क्यों न हुई हो। कानून इसे मंशा से ज्यादा प्रभाव के आधार पर देखता है। कई लोग जिज्ञासा या किसी खबर को समझने के लिए ऐसे शब्द सर्च कर लेते हैं, लेकिन यही एक गलती उन्हें लंबे कानूनी झंझट में फंसा सकती है। इसलिए ऐसे किसी भी कंटेंट से दूर रहना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।
हैकिंग, फ्रॉड और हथियारों से जुड़ी सर्च भी बन सकती है मुसीबत
आजकल साइबर क्राइम तेजी से बढ़ रहा है, इसी वजह से पुलिस और साइबर एजेंसियां खास कीवर्ड्स पर कड़ी नजर रखती हैं। फोन हैक करने, बैंक अकाउंट तोड़ने, OTP या UPI फ्रॉड, पासवर्ड क्रैक करने जैसे शब्दों की Google Search करना खतरे की घंटी है। भले ही कोई व्यक्ति सिर्फ जानकारी के लिए सर्च कर रहा हो, लेकिन सिस्टम इसे संदिग्ध गतिविधि मान सकता है।
इसके अलावा घर पर बम बनाने, अवैध हथियार, 3D प्रिंटेड गन या हथियारों में बदलाव से जुड़ी खोजें सीधे गंभीर अपराध से जुड़ी मानी जाती हैं। सिर्फ जिज्ञासा या किसी डॉक्यूमेंट्री के बाद सर्च करना भी जांच एजेंसियों का ध्यान खींच सकता है।
नशीले पदार्थ बनाने, बेचने या डार्क वेब लिंक, गुप्त सौदों के टूल्स सर्च करना भी बेहद जोखिम भरा है। ऐसे मामलों में नारकोटिक्स और साइबर कानून एक साथ लागू हो सकते हैं। बहुत से लोग सोचते हैं कि ऑनलाइन पहचान छिपी रहती है, लेकिन हकीकत यह है कि डिजिटल दुनिया में कुछ भी पूरी तरह छिपा नहीं होता।
फर्जी दस्तावेज और AI से गलत सवाल भी डाल सकते हैं मुसीबत में
आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट या अन्य सरकारी दस्तावेज फर्जी बनाने, खरीदने या बदलने से जुड़ी Google Search भी सीधे अपराध की श्रेणी में आती है। यह पहचान चोरी और धोखाधड़ी से जुड़ा मामला माना जाता है। ऐसे मामलों में आईटी एक्ट के साथ-साथ IPC की धाराएं भी लग सकती हैं।
आज के समय में लोग AI प्लेटफॉर्म्स को भी सुरक्षित समझकर उनसे हर तरह के सवाल पूछ लेते हैं। लेकिन यह एक बड़ी गलतफहमी है। अधिकतर AI सिस्टम अवैध अनुरोधों को ब्लॉक करते हैं और संदिग्ध गतिविधियों को फ्लैग किया जा सकता है। इन्हें कोई गुप्त या सुरक्षित कोना समझना भारी पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इंटरनेट का इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए। जानकारी लेना गलत नहीं है, लेकिन कुछ सीमाएं होती हैं जिन्हें पार करना कानूनी परेशानी को न्योता देता है। बेहतर यही है कि किसी भी ऐसे विषय से दूरी बनाई जाए जो कानून के दायरे में आता हो। एक गलत Google Search आपकी जिंदगी में बड़ा संकट खड़ा कर सकती है, इसलिए सतर्क रहना ही सबसे बड़ी समझदारी है।
