महाराष्ट्र में जिला परिषद चुनावों से पहले सियासत का तापमान चरम पर है, लेकिन लातूर जिले से सामने आई एक घटना ने राजनीतिक विरोध की सभी सीमाएं तोड़ दीं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के विधायक और पूर्व मंत्री संजय बंसोडे के स्थानीय कार्यालय के बाहर एक युवक द्वारा खुलेआम पेशाब करने की घटना ने हर किसी को चौंका दिया। यह मामला बुधवार, 21 जनवरी का बताया जा रहा है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। घटना उदगीर तहसील की है, जहां टिकट बंटवारे को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष अब सड़कों पर उतरता नजर आया। इस विरोध ने न सिर्फ NCP को कठघरे में खड़ा किया, बल्कि राजनीतिक मर्यादा और विरोध के तरीकों पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया।
पिता की दावेदारी खारिज होने पर बेटे का विरोध
जानकारी के मुताबिक, यह विरोध प्रदर्शन मधुकर एकुरकेकर को जिला परिषद चुनाव का टिकट न मिलने के कारण किया गया। मधुकर एकुरकेकर उदगीर के निदेबन क्षेत्र के एक जाने-माने सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता माने जाते हैं, जो लंबे समय से जमीनी स्तर पर पार्टी के लिए काम कर रहे थे। आगामी 5 फरवरी को होने वाले जिला परिषद चुनावों के लिए जब NCP ने उम्मीदवारों की सूची जारी की, तो उसमें उनका नाम नहीं था। इसी फैसले से नाराज होकर उनके बेटे नितिन एकुरकेकर ने विधायक संजय बंसोडे के कार्यालय के बाहर यह आपत्तिजनक कदम उठाया। नितिन का आरोप है कि वर्षों की मेहनत और पार्टी के प्रति निष्ठा के बावजूद उनके पिता को नजरअंदाज किया गया, जो उनके और समर्थकों के लिए असहनीय था।
वीडियो वायरल, फिर हटाया गया
घटना के तुरंत बाद नितिन एकुरकेकर ने अपने विरोध का वीडियो खुद सोशल मीडिया पर शेयर किया, जिसने कुछ ही घंटों में तूल पकड़ लिया। वीडियो वायरल होते ही राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया और आम लोगों के बीच भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। कई लोगों ने इसे लोकतांत्रिक विरोध के नाम पर अशोभनीय हरकत बताया, जबकि कुछ समर्थकों ने इसे पार्टी नेतृत्व के खिलाफ हताशा का प्रतीक कहा। बढ़ते विवाद और आलोचना के बाद नितिन ने यह वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट से डिलीट कर दिया, लेकिन तब तक यह अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर फैल चुका था। घटना ने यह भी दिखा दिया कि सोशल मीडिया के दौर में एक गलत कदम कैसे पूरी पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है।
टिकट बंटवारे पर उठे सवाल
इस पूरे मामले के बाद निदेबन क्षेत्र में मधुकर एकुरकेकर के समर्थकों में जबरदस्त नाराजगी देखने को मिल रही है। समर्थकों का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए काम किया, लेकिन चुनाव के वक्त उन्हें किनारे कर दिया गया। वहीं, इस घटना ने NCP नेतृत्व के सामने भी एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है, क्योंकि जिला परिषद चुनाव से पहले इस तरह के विरोध से पार्टी की छवि प्रभावित हो सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला सिर्फ एक टिकट का नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर पनप रहे असंतोष का संकेत है। अब देखने वाली बात यह होगी कि पार्टी नेतृत्व इस विवाद को कैसे संभालता है और क्या ऐसे मामलों से सबक लेकर भविष्य में टिकट वितरण की प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाया जाता है या नहीं।
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