पाकिस्तान और आतंकवाद का रिश्ता एक बार फिर बेनकाब हुआ है। लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी अबू मूसा कश्मीरी का एक वीडियो सामने आया है, जिसने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस वीडियो में मूसा कश्मीरी सैकड़ों लोगों की भीड़ के सामने खुलेआम हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की बात करता दिखाई दे रहा है। वह बिना किसी डर के कहता है कि “आजादी भीख मांगने से नहीं, हिंदुओं का गला काटने से मिलेगी।” यह बयान सिर्फ नफरत नहीं, बल्कि संगठित आतंकवाद की मानसिकता को दिखाता है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह भाषण किसी छिपे हुए ठिकाने पर नहीं, बल्कि सार्वजनिक मंच से दिया जा रहा है, जहां न तो किसी एजेंसी का डर दिखता है और न ही कानून का। इससे यह साफ हो जाता है कि पाकिस्तान में ऐसे आतंकियों को खुली छूट मिली हुई है और वे खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस करते हैं।
लश्कर का सीनियर कमांडर और सत्ता तक दावा
अबू मूसा कश्मीरी कोई छोटा-मोटा नाम नहीं है। वह लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े संगठन JKUM का सीनियर कमांडर बताया जाता है। अपने भड़काऊ भाषण में वह यह दावा भी करता है कि उसने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और कई वरिष्ठ मंत्रियों के सामने सीधे तौर पर कश्मीर मुद्दे पर अपनी बात रखी है। मूसा का कहना है कि कश्मीर का समाधान सिर्फ “जिहाद” के रास्ते से ही संभव है। यह दावा अगर आधा भी सच है, तो यह पाकिस्तान सरकार और आतंकवादी संगठनों के बीच गहरे रिश्तों की ओर इशारा करता है। पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खुद को आतंकवाद का शिकार बताता रहा है, लेकिन ऐसे वीडियो यह दिखाते हैं कि वहां आतंकी न केवल खुलेआम भाषण दे रहे हैं, बल्कि सत्ता के शीर्ष तक अपनी पहुंच का दावा भी कर रहे हैं। इससे भारत के खिलाफ चल रही जिहादी हिंसा को मिलने वाले राजनीतिक और वैचारिक समर्थन की तस्वीर साफ होती है।
गाजा संकट की आड़ में नई साजिश और भर्ती
रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात का फायदा उठाने में जुटे हैं। गाजा में चल रहे संकट को मानवीय मदद का नाम देकर ये संगठन फंड जुटा रहे हैं और उसी पैसे का इस्तेमाल अपने आतंकी ढांचे को फिर से खड़ा करने में कर रहे हैं। एथेंस स्थित थिंक टैंक ‘जियोपॉलिटिको’ की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित ये संगठन राहत अभियानों की आड़ में नए कैडर की भर्ती कर रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर के परिवार के सदस्य भी इन फंडिंग अभियानों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। यह स्थिति इसलिए और खतरनाक हो जाती है क्योंकि युवा वर्ग को भावनात्मक मुद्दों के जरिए कट्टरपंथ की ओर धकेला जा रहा है, जिससे भविष्य में हिंसा का दायरा और बढ़ सकता है।
भारत के लिए बढ़ता खतरा और अंतरराष्ट्रीय सवाल
अबू मूसा कश्मीरी का वीडियो सिर्फ एक बयान नहीं है, बल्कि यह भारत की सुरक्षा के लिए एक खुली चेतावनी है। यह दिखाता है कि पाकिस्तान में आतंकी नेटवर्क न केवल जीवित हैं, बल्कि नए सिरे से संगठित भी हो रहे हैं। भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह समझाने की कोशिश करता रहा है कि पाकिस्तान आतंकवाद का केंद्र बना हुआ है, और ऐसे वीडियो उस दावे को मजबूत करते हैं। सवाल यह भी उठता है कि जब आतंकी प्रधानमंत्री तक अपनी पहुंच का दावा कर रहे हों, तो पाकिस्तान के आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के दावे कितने सच्चे हैं। आने वाले समय में यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर और गंभीरता से उठाया जा सकता है, क्योंकि यह केवल भारत-पाकिस्तान का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की शांति और सुरक्षा का सवाल बन चुका है।
