उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक हलकों से लेकर आम लोगों तक को हैरान कर दिया है। यहां राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) में तैनात एक सिपाही को सिर्फ इसलिए कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया, क्योंकि उसने ड्यूटी के दौरान पेड़ से अमरूद तोड़कर खा लिया। आमतौर पर अनुशासन, कर्तव्य और सख्त नियमों के लिए जाने जाने वाले बल में इस तरह का मामला सामने आना अपने आप में असामान्य माना जा रहा है। यह घटना सोशल मीडिया और चर्चा के दायरे में इसलिए भी आ गई, क्योंकि सिपाही ने नोटिस के जवाब में जो वजह बताई, उसने अधिकारियों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया। मामला छोटा जरूर है, लेकिन इसके पीछे नियम, जिम्मेदारी और मानवीय जरूरतों का टकराव साफ दिखाई देता है।
ड्यूटी के दौरान अमरूद तोड़ने का आरोप, क्या लिखा था नोटिस में
जानकारी के मुताबिक, SDRF में तैनात सिपाही आदर्श अग्निहोत्री की 4 जनवरी 2025 से 7 जनवरी 2025 तक कमांड हाउस गार्ड ड्यूटी लगी थी। इसी दौरान कमांड हाउस के सामने लगे अमरूद के पेड़ से फल तोड़े जाने की बात सामने आई। विभागीय जांच के बाद सिपाही को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया कि ड्यूटी के दौरान न केवल अमरूद तोड़े गए, बल्कि इस घटना को रोकने या उच्चाधिकारियों को इसकी जानकारी देने का प्रयास भी नहीं किया गया। नोटिस में इसे लापरवाही, अनुशासनहीनता और कर्तव्य के प्रति शिथिलता बताया गया। विभाग ने सिपाही से यह भी पूछा कि क्यों न उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। इस नोटिस के बाद मामला औपचारिक रूप से रिकॉर्ड में आ गया और सिपाही से लिखित जवाब मांगा गया।
नोटिस के जवाब में पेट दर्द की दलील, अफसर भी हुए हैरान
विभागीय नोटिस के जवाब में सिपाही आदर्श अग्निहोत्री ने जो स्पष्टीकरण दिया, वही इस पूरे मामले का सबसे दिलचस्प और चौंकाने वाला पहलू बन गया। सिपाही ने अपने जवाब में बताया कि 5 जनवरी 2025 की रात स्पेशल खाने में परोसे गए पनीर की गुणवत्ता सही नहीं थी, जिसे खाने के बाद उसे तेज पेट दर्द हो गया। उसने आगे लिखा कि छुट्टी न होने के कारण वह डॉक्टर को नहीं दिखा सका। इसी दौरान उसने यूट्यूब पर देखा कि अमरूद खाने से पेट दर्द में राहत मिल सकती है। इसी जानकारी के आधार पर उसने अमरूद तोड़कर खाया। सिपाही का यह जवाब विभागीय अधिकारियों के लिए अप्रत्याशित था। एक ओर जहां नियमों का उल्लंघन माना जा रहा था, वहीं दूसरी ओर सिपाही ने अपनी मजबूरी और स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर मामले को मानवीय दृष्टिकोण से देखने की अपील की।
पहली गलती बताकर मांगी माफी, अब क्या होगा आगे
अपने जवाब में सिपाही ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका इरादा किसी भी तरह से अनुशासन तोड़ने का नहीं था। उसने इसे अपनी पहली और अनजाने में हुई गलती बताया और विभाग से क्षमा करने की अपील की। सिपाही ने भरोसा दिलाया कि भविष्य में वह कभी भी ऐसी गलती नहीं करेगा और ड्यूटी के नियमों का पूरी निष्ठा से पालन करेगा। फिलहाल यह मामला विभागीय स्तर पर विचाराधीन है और अधिकारियों की ओर से आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाना बाकी है। हालांकि यह घटना प्रशासनिक सख्ती और मानवीय जरूरतों के बीच संतुलन की एक मिसाल बनकर सामने आई है। लखनऊ का यह मामला यह सवाल भी खड़ा करता है कि क्या हर नियम को एक ही तराजू से तौला जाना चाहिए या फिर परिस्थितियों को भी समझना जरूरी है। यही वजह है कि एक साधारण अमरूद अब पूरे सिस्टम की चर्चा का विषय बन गया है।
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