Monday, February 2, 2026
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लाखों वोटरों का नाम गायब? UP SIR को लेकर मचे बवाल पर चुनाव आयोग का बड़ा खुलासा

UP SIR पर बड़ा खुलासा! क्या सच में कटे 2.80 करोड़ मतदाताओं के नाम? जानिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने क्या कहा, सुधार का मौका, अंतिम वोटर लिस्ट और पूरी सच्चाई।

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 UP SIR: उत्तर प्रदेश में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर इन दिनों राजनीतिक हलकों से लेकर आम मतदाताओं तक के बीच सवालों की बाढ़ आ गई है। विपक्षी दलों के आरोपों के बाद यह चर्चा तेज हो गई कि क्या सच में लाखों लोगों के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए हैं। इसी बीच राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा ने मीडिया के सामने आकर पूरी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने दो टूक कहा कि SIR का उद्देश्य किसी भी मतदाता का नाम हटाना नहीं, बल्कि मतदाता सूची को साफ, सही और पारदर्शी बनाना है। चुनाव आयोग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि सिर्फ पात्र और जीवित मतदाताओं के नाम ही सूची में दर्ज रहें, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया मजबूत हो सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत निर्वाचन आयोग किसी भी राजनीतिक दल के दबाव में काम नहीं करता और पूरी प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष है।

ड्राफ्ट लिस्ट जारी, नाम जांचने और सुधार का पूरा मौका

मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि SIR प्रक्रिया का पहला चरण पूरा हो चुका है और 6 जनवरी को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर दी गई है। अब कोई भी मतदाता बहुत आसानी से अपना नाम इस सूची में देख सकता है। इसके लिए भारत निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट, नजदीकी बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) या निर्वाचन कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि अगर किसी मतदाता के नाम, उम्र, पता या अन्य विवरण में कोई गलती है, तो घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। 6 जनवरी से 6 फरवरी तक सुधार का समय दिया गया है, जिसके दौरान तय फॉर्म भरकर ऑफलाइन या ऑनलाइन माध्यम से त्रुटियां ठीक कराई जा सकती हैं। गांव और शहर, दोनों स्तर पर अंतिम मतदाता सूची 6 मार्च को प्रकाशित की जाएगी, जिसमें सभी वैध सुधार शामिल होंगे।

2.80 करोड़ नाम कटने का सच क्या है? जानिए असली वजह

सीईओ नवदीप रिणवा ने उन दावों पर भी विस्तार से जवाब दिया, जिनमें कहा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में करीब 2 करोड़ 80 लाख नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस आंकड़े को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है। असल में ये वे नाम हैं, जो या तो अब उस पते पर नहीं रहते, किसी अन्य स्थान पर शिफ्ट हो चुके हैं, जिनकी मृत्यु हो चुकी है, या फिर जिनके नाम दो अलग-अलग जगहों की मतदाता सूची में दर्ज थे। उन्होंने बताया कि दो जगह नाम होना न केवल गलत है, बल्कि गैरकानूनी भी है। SIR के दौरान ऐसे मतदाताओं ने खुद एक स्थान से नाम हटवाया है। उन्होंने यह भी माना कि मानवीय या तकनीकी कारणों से कुछ वास्तविक मतदाताओं के नाम गलती से छूट सकते हैं, लेकिन उनके लिए सुधार का पूरा अवसर दिया गया है। यदि कोई पात्र मतदाता आवेदन करता है, तो BLO द्वारा जांच के बाद उसका नाम अंतिम सूची में जोड़ा जाएगा।

राजनीतिक आरोपों पर जवाब, मतदाताओं को दी बड़ी राहत

समाजवादी पार्टी और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए नवदीप रिणवा ने कहा कि चुनाव आयोग किसी भी दल के बयान से प्रभावित नहीं होता। उन्होंने ‘भेड़िया’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर भी संयमित प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आयोग एक संवैधानिक संस्था है और निष्पक्षता उसकी पहचान है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे SIR के माध्यम से अधिक से अधिक पात्र मतदाताओं के नाम जुड़वाने में सहयोग करें। यदि किसी मतदाता ने फॉर्म भरने के बावजूद नाम सूची में नहीं देखा है, तो उसे दोबारा शिकायत दर्ज करानी चाहिए। सभी शिकायतों का समयबद्ध निपटारा किया जाएगा। SIR प्रक्रिया पूरी होने के बाद नए या संशोधित मतदाताओं को वोटर आईडी कार्ड भी उपलब्ध कराया जाएगा, जो डाक या ऑनलाइन माध्यम से मिल सकेगा। कुल मिलाकर चुनाव आयोग का कहना है कि लक्ष्य सिर्फ एक है—कोई भी सही मतदाता छूटे नहीं और लोकतंत्र की नींव और मजबूत हो।

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