उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में गुरुवार देर रात प्रशासन की एक सख्त और सुनियोजित कार्रवाई ने पूरे शहर का ध्यान खींच लिया। शहर के सबसे व्यस्त और संवेदनशील इलाकों में शामिल घंटाघर क्षेत्र में आधी रात को बुलडोजर चला और सरकारी जमीन पर बनी एक अवैध मजार को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया। यह कार्रवाई जिला प्रशासन और मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की संयुक्त टीम ने की। कार्रवाई इतनी अचानक और गोपनीय रही कि आसपास के लोगों को इसकी भनक तक नहीं लगी। प्रशासन ने साफ संकेत दे दिया है कि अब सरकारी भूमि पर किसी भी तरह का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे वह किसी भी रूप में क्यों न हो।
सरकारी जमीन पर अतिक्रमण, नोटिस के बाद हुआ बड़ा एक्शन
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, घंटाघर के पास डिस्पेंसरी रोड स्थित एचएनबी कॉम्प्लेक्स परिसर में बनी यह मजार लंबे समय से सरकारी भूमि पर अवैध रूप से खड़ी थी। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण ने पहले ही इस निर्माण को नियमों के खिलाफ बताते हुए नोटिस जारी किया था। मजार प्रबंधन को सात दिन का समय दिया गया था, ताकि वह जमीन के स्वामित्व और निर्माण से जुड़े वैध दस्तावेज प्रस्तुत कर सके। हालांकि तय समय सीमा के भीतर कोई भी संतोषजनक कागजात नहीं दिए गए। इसके बाद शासन स्तर से स्पष्ट निर्देश मिले कि अवैध कब्जे को तत्काल हटाया जाए। प्रशासन का मानना था कि यह अतिक्रमण न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सार्वजनिक व्यवस्था और शहरी नियोजन के लिए भी गंभीर समस्या बनता जा रहा था।
रात में क्यों चली कार्रवाई? रणनीति के पीछे की वजह
इस पूरी कार्रवाई को देर रात अंजाम देने के पीछे प्रशासन की स्पष्ट रणनीति थी। अधिकारियों के अनुसार, घंटाघर इलाका दिन के समय बेहद व्यस्त रहता है और यहां किसी भी तरह की कार्रवाई से कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका बनी रहती है। इसी कारण रात का समय चुना गया, ताकि किसी तरह का विरोध, भीड़ या तनाव की स्थिति पैदा न हो। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में एमडीडीए की प्रवर्तन टीम मौके पर पहुंची। मजिस्ट्रेट, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और प्राधिकरण के आला अफसर खुद मौके पर मौजूद रहे। कुछ ही घंटों के भीतर पूरी मजार को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया। राहत की बात यह रही कि कार्रवाई के दौरान किसी भी तरह का हंगामा, विरोध या अप्रिय घटना सामने नहीं आई।
प्रशासन का सख्त संदेश: आगे भी जारी रहेगी मुहिम
कार्रवाई के बाद प्रशासन और एमडीडीए ने साफ शब्दों में कहा है कि यह सिर्फ शुरुआत है। शहर और आसपास के इलाकों में चिह्नित किए गए सभी अवैध कब्जों के खिलाफ आगे भी इसी तरह सख्त कदम उठाए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण से न केवल सार्वजनिक सुविधाएं प्रभावित होती हैं, बल्कि सुरक्षा और यातायात जैसी अहम व्यवस्थाएं भी बाधित होती हैं। घंटाघर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में यह मजार ट्रैफिक और सुरक्षा दोनों दृष्टि से चुनौती बनी हुई थी। प्रशासन का उद्देश्य स्पष्ट है—सरकारी भूमि को अतिक्रमणमुक्त करना और कानून-व्यवस्था को हर हाल में बनाए रखना। इसके लिए कार्रवाई का समय और तरीका पूरी तरह रणनीतिक रूप से तय किया जाएगा, ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था को पनपने का मौका न मिले।
