दिल्ली की डॉ. कर्णी सिंह शूटिंग रेंज में 16 दिसंबर को नेशनल मैच खत्म होने के बाद एक उभरती हुई महिला शूटर ने खेल जगत को झकझोर देने वाले आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि भारतीय शूटिंग टीम के कोच अंकुश भारद्वाज ने उन्हें सूरजकुंड स्थित ताज होटल बुलाया। शुरू में कोच ने उन्हें लॉबी में बैठने के लिए कहा, लेकिन फिर बातचीत के बहाने अपने कमरे में ले गया। पीड़िता के अनुसार, कोच ने उनके कंधे और पीठ के दर्द का हवाला लेकर ‘लेटने को कहा’ और जबरदस्ती अश्लील हरकतें की। विरोध करने पर पीड़िता ने चिल्लाया, तभी कोच पीछे हटे। घटना ने खेल जगत में हड़कंप मचा दिया और कोच की प्रतिष्ठा को गंभीर चुनौती दी है।
धमकी के डर से पीड़िता ने रखी चुप्पी
पीड़िता ने बताया कि घटना के बाद कोच ने उसे धमकी दी कि “कुछ नहीं हुआ, सामान्य व्यवहार करो, वरना मैं तुम्हारे परिवार और करियर को बर्बाद कर दूंगा।” इस डर और सदमे के चलते पीड़िता कई दिन तक चुप रही और पढ़ाई और परीक्षाओं के बहाने खुद को अलग रखा। लेकिन दिसंबर के अंत में मोहाली में सहेली से मिलने के बाद पता चला कि कोच ने इसी तरह की हरकतें दूसरी शूटर के साथ भी की थीं। इसके बाद पीड़िता ने हिम्मत जुटाई और 4 जनवरी को अपनी मां को पूरी सच्चाई बताई। परिवार का कहना है कि आरोपी काफी रसूखदार है, इसलिए उन्हें डर है कि वह जांच को प्रभावित कर सकता है
Airbnb में भी हुई गंदी हरकत
शिकायत में एक और घटना का जिक्र है। 10 दिसंबर को मोहाली में जब शूटर लड़कियां एक Airbnb में ठहरी हुई थीं, तब कोच बिना किसी अनुमति के सुबह-सुबह उनके कमरे में घुस गए और लड़कियों के बेड पर लेट गए। इससे सभी शूटर असहज और डरी हुई थीं। इस घटना ने खेल जगत में गंभीर सवाल खड़े कर दिए कि क्या राष्ट्रीय स्तर के कोच अपनी जिम्मेदारी और मर्यादा का उल्लंघन कर रहे हैं। अंकुश भारद्वाज खुद कॉमनवेल्थ गेम्स के मेडलिस्ट हैं और भारतीय शूटिंग टीम के कोच के रूप में उनकी प्रतिष्ठा काफी ऊँची मानी जाती है।
परिवार की न्याय की मांग, प्रशासन से जांच की अपील
पीड़िता की मां ने प्रशासन से अपील की है कि ताज होटल और Airbnb के CCTV फुटेज तुरंत कब्जे में लिए जाएं ताकि सबूत सुरक्षित रहें। परिवार का कहना है कि आरोपी अपने रसूख का इस्तेमाल कर जांच को प्रभावित कर सकता है। पीड़िता ने न्याय की मांग करते हुए कहा कि खेल जगत में ऐसी घटनाओं के खिलाफ सख्त कदम उठाना जरूरी है ताकि अन्य खिलाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। खेल संगठनों और महिला अधिकार संगठनों ने भी मामले को गंभीरता से लिया है और कोच के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। अब सबकी निगाह प्रशासन और खेल मंत्रालय की ओर है कि कब और कैसे इस गंभीर मामले की जांच पूरी होगी।
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