बिहार के सोनपुर की रहने वाली रोजी नेहा सिंह, जिन्हें सोशल मीडिया पर ‘बिहारी रशियन गर्ल’ के नाम से जाना जाता है, ने खुद की मेहनत और हुनर से झारखंड की राजधानी रांची में लिट्टी-चिकन का स्टॉल शुरू किया। शुरू में रोजी एक ब्यूटिशियन थीं और शौकिया कुकिंग वीडियो बनाती थीं। अपने छोटे व्यवसाय को प्रमोट करने के लिए उन्होंने सोशल मीडिया का सहारा लिया। उनके एक मजाकिया वीडियो में, जिसमें उन्होंने खुद को ‘खांटी बिहारी लड़की’ बताया, देखते ही देखते लाखों लोगों ने देखा और तारीफ भी की। पहली नजर में यह सफलता की कहानी थी, लेकिन जल्द ही यह उनके लिए मुश्किलों का कारण बन गई।
सोशल मीडिया की शोहरत और ट्रोलिंग
वायरल होने के बाद लोग रोजी से लगातार एक जैसे कंटेंट की उम्मीद करने लगे। जब रोजी हर सवाल का जवाब नहीं दे पाईं, तो कमेंट सेक्शन जहर से भर गया। ऑनलाइन ट्रोलिंग यहीं नहीं रुकी। कई बार शराब पीकर लोग उनके स्टॉल तक पहुंचने लगे और जबरदस्ती सेल्फी, फोटो और निजी सवाल पूछने लगे। इस अनुभव ने रोजी की जिंदगी पर भारी दबाव डाल दिया और उन्हें मानसिक तौर पर परेशान कर दिया। यह कहानी दिखाती है कि सोशल मीडिया की शोहरत हमेशा सकारात्मक नहीं होती, कभी-कभी यह बोझ बन जाती है।
व्यूज नहीं चाहिए, बस शांति से कारोबार
आजतक डिजिटल से बातचीत में रोजी ने साफ कहा, “मुझे व्यूज नहीं चाहिए, बस शांति से बिजनेस करना है।” उन्हें सोशल मीडिया की कमाई या मॉनेटाइजेशन की कोई समझ नहीं थी और उनका परिवार भी डिजिटल दुनिया से दूर है। लगातार परेशानियों के चलते रोजी को आखिरकार अपने स्टॉल को बंद करना पड़ा। उनका कहना है कि वह अब सिर्फ अपने व्यवसाय पर ध्यान देना चाहती हैं और सोशल मीडिया की शोहरत से दूरी बनाना चाहती हैं। यह कहानी यह भी बताती है कि कभी-कभी आम लोगों की जिंदगी में वायरल होना राहत नहीं, बल्कि बोझ बन जाता है।
वायरल कल्चर का असर छोटे व्यवसायों पर
रोजी की कहानी सिर्फ एक कंटेंट क्रिएटर की नहीं, बल्कि उस कड़वे सच की भी गवाही देती है, जहां सोशल मीडिया की वायरल कल्चर छोटे कारोबार और आम लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ रही है। व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लेना आम बात है, लेकिन ट्रोलिंग, निजी जगहों में घुसपैठ और लगातार ध्यान की मांग ने रोजी को मजबूर किया कि वह अपनी जिंदगी को प्राथमिकता दें। यह कहानी अन्य छोटे व्यवसायियों के लिए चेतावनी भी है कि सोशल मीडिया की शोहरत हमेशा सुखद नहीं होती और इसकी चकाचौंध में कई बार व्यक्ति अपने काम और निजी शांति दोनों खो देता है।
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