वेनेजुएला में बीती रात हालात अचानक युद्ध जैसे हो गए, जब राजधानी काराकास समेत मिरांडा, अरगुआ और ला गुइरा जैसे अहम इलाकों में जोरदार धमाकों की आवाज़ें गूंजीं। अमेरिकी वायुसेना द्वारा की गई इस कथित एयरस्ट्राइक ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। कुछ ही घंटों बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि इस सैन्य कार्रवाई के दौरान वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनकी पत्नी के साथ गिरफ्तार कर लिया गया है। हालांकि वेनेजुएला सरकार की ओर से इस दावे की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई, लेकिन अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। सवाल उठ रहा है कि क्या यह सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई है या फिर वेनेजुएला की सत्ता बदलने की तैयारी का संकेत?
मादुरो बनाम ट्रंप: पुरानी दुश्मनी, नए आरोप
डोनाल्ड ट्रंप और निकोलस मादुरो के बीच टकराव कोई नया नहीं है। ट्रंप लंबे समय से मादुरो सरकार पर अवैध अप्रवास, ड्रग्स तस्करी और अंतरराष्ट्रीय अपराधों को बढ़ावा देने के आरोप लगाते रहे हैं। अमेरिका का दावा है कि 2013 के बाद वेनेजुएला में आए आर्थिक संकट के चलते लाखों लोग देश छोड़कर अमेरिका पहुंचे, जिसकी जिम्मेदारी मादुरो सरकार की नीतियों पर जाती है। ट्रंप मादुरो को ‘ड्रग किंगपिन’ तक कह चुके हैं और उनकी गिरफ्तारी पर 5 करोड़ डॉलर का इनाम घोषित कर चुके हैं। वहीं मादुरो लगातार यह कहते आए हैं कि अमेरिका ड्रग्स के आरोपों की आड़ में उनकी सरकार को गिराना चाहता है और असल मकसद वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार पर कब्जा करना है।
विपक्ष, नोबेल पुरस्कार और सत्ता का सवाल
इस पूरे घटनाक्रम में वेनेजुएला की विपक्षी राजनीति भी अहम भूमिका निभा रही है। देश की प्रमुख विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचोडा को मादुरो सरकार ने चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित कर दिया था। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी छवि मजबूत होती गई और अक्टूबर 2025 में उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। बताया जाता है कि मादुरो सरकार से बचते हुए वह गुप्त रास्ते से नॉर्वे के ओस्लो पहुंची थीं। अगर मादुरो की गिरफ्तारी का दावा सही साबित होता है, तो वेनेजुएला के संविधान के अनुसार सत्ता उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज को मिल सकती है। हालांकि विपक्ष का कहना है कि निर्वासित नेता एडमंडो गोंजालेज ही असली राष्ट्रपति हैं, जिससे सत्ता को लेकर असमंजस और गहरा गया है।
आगे क्या? वेनेजुएला और दुनिया की नजरें
निकोलस मादुरो पिछले 13 सालों से वेनेजुएला की सत्ता में हैं और इस दौरान देश ने राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक बदहाली और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का दौर देखा है। 2024 के चुनावों के बाद भी उनकी वैधता पर सवाल उठते रहे हैं। अब अमेरिका की इस कथित कार्रवाई के बाद वेनेजुएला के भविष्य को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है। क्या यह कार्रवाई वास्तव में मादुरो शासन के अंत की शुरुआत है, या फिर यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति में दबाव बनाने की एक और रणनीति? आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि वेनेजुएला की सत्ता किसके हाथ जाती है और लैटिन अमेरिका की राजनीति पर इसका क्या असर पड़ता है।
