सोशल मीडिया आज केवल मनोरंजन का जरिया नहीं रहा, बल्कि लोगों की जिंदगी के बड़े फैसलों की वजह भी बनता जा रहा है। रायबरेली से सामने आई यह घटना भी कुछ ऐसी ही है, जिसने इलाके में हलचल मचा दी है। संत रविदास नगर की रहने वाली एक मुस्लिम युवती की दोस्ती रायबरेली के हरचंदपुर निवासी एक हिंदू युवक से Instagram के जरिए हुई। शुरुआत सामान्य बातचीत से हुई, लेकिन समय के साथ दोनों के बीच समझ और भावनात्मक जुड़ाव गहराता चला गया। चैटिंग, कॉल और वीडियो बातचीत के दौरान दोनों को यह एहसास हुआ कि वे एक-दूसरे के बिना नहीं रह सकते। धीरे-धीरे दोस्ती ने प्यार का रूप ले लिया और दोनों ने साथ जीवन बिताने का मन बना लिया। सोशल मीडिया पर बनी यह पहचान अब एक नए रिश्ते में बदलने की दहलीज पर खड़ी थी।
दिल के फैसले के लिए रायबरेली पहुंची युवती
जब दोनों ने शादी का फैसला किया तो युवती ने अपने जीवन का बड़ा कदम उठाया। बताया जा रहा है कि वह लगभग 250 किलोमीटर का सफर तय कर रायबरेली पहुंची। यह सफर केवल दूरी का नहीं था, बल्कि एक ऐसे निर्णय का था, जिसमें समाज, परिवार और भविष्य से जुड़े कई सवाल शामिल थे। रायबरेली पहुंचने के बाद युवती सीधे हरचंदपुर क्षेत्र स्थित अचलेश्वर मंदिर पहुंची। यहां पहले से मौजूद युवक से मुलाकात हुई और दोनों ने अपने फैसले पर अंतिम मुहर लगाने का मन बना लिया। मंदिर परिसर में मौजूद लोगों के लिए यह दृश्य चौंकाने वाला था, क्योंकि सोशल मीडिया पर शुरू हुई कहानी अब हकीकत में बदल रही थी। युवती का कहना था कि उसने यह फैसला पूरी समझ और अपनी इच्छा से लिया है।
अचलेश्वर मंदिर में सात फेरे, संगठन की मौजूदगी में हुआ विवाह
अचलेश्वर मंदिर परिसर में सोमवार को विवाह की रस्में पूरी की गईं। बताया जा रहा है कि करणी सेना के पदाधिकारियों की मौजूदगी में दोनों का विवाह संपन्न कराया गया। संगठन के जिलाध्यक्ष सत्येंद्र सिंह ने जानकारी दी कि युवक और युवती लंबे समय से एक-दूसरे को जानते थे और दोनों शादी करना चाहते थे। युवती के रायबरेली पहुंचने के बाद संगठन के लोगों से संपर्क किया गया, जिसके बाद उनकी मौजूदगी में विवाह कराया गया। मंदिर में वैदिक मंत्रों के बीच सात फेरे लिए गए और दोनों ने एक-दूसरे के साथ जीवन भर साथ निभाने का संकल्प लिया। विवाह के दौरान सुरक्षा और शांति व्यवस्था का भी ध्यान रखा गया, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति न उत्पन्न हो।
इलाके में चर्चा का विषय
यह विवाह अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। कोई इसे सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव का उदाहरण बता रहा है तो कोई इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आज के समय में सोशल मीडिया रिश्तों को जोड़ने का माध्यम बन चुका है, लेकिन ऐसे फैसलों में समझ और जिम्मेदारी भी जरूरी है। वहीं कुछ लोग इसे साहसिक कदम मान रहे हैं, तो कुछ इसे परंपराओं से जोड़कर देख रहे हैं। युवती और युवक दोनों का कहना है कि उन्होंने यह निर्णय बिना किसी दबाव के लिया है और वे अपने भविष्य को लेकर आश्वस्त हैं। इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि डिजिटल दौर में बने रिश्ते अब वास्तविक जीवन में कितनी तेजी से और गहराई से बदल रहे हैं।
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