छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले से सामने आया यह मामला किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। यहां एक व्यक्ति को कथित तौर पर हत्या का शिकार मान लिया गया, उसका शव पहचान लिया गया, गांव में मातम छाया और पूरे रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार तक कर दिया गया। परिवार ने बेटे की मौत का गम मनाया, मां-बाप ने कलेजे पर पत्थर रखकर चिता को अग्नि दी और गांव वालों ने उसे हमेशा के लिए विदा मान लिया। पुलिस ने भी मामले को मर्डर मानते हुए जांच शुरू कर दी। आरोपियों की तलाश, पूछताछ और केस की फाइल आगे बढ़ने लगी। किसी को जरा भी अंदाजा नहीं था कि जिस शख्स को मृत मान लिया गया है, वह असल में जिंदा है और कुछ ही हफ्तों बाद खुद चलकर अपने घर लौट आएगा। इस घटना ने न सिर्फ पुलिस जांच पर सवाल खड़े कर दिए, बल्कि पूरे इलाके में सनसनी फैला दी।
कथित मर्डर केस और पुलिस की शुरुआती जांच
जानकारी के मुताबिक, करीब दो महीने पहले जशपुर जिले के एक गांव में एक अज्ञात शव मिलने की सूचना पुलिस को मिली थी। शव की हालत इतनी खराब थी कि पहचान करना मुश्किल था। कपड़ों और कुछ सामान्य निशानों के आधार पर पुलिस और परिजनों ने यह मान लिया कि शव उसी व्यक्ति का है, जो कुछ दिनों से लापता था। परिवार ने भी गहरे सदमे और भावनात्मक दबाव में पहचान की पुष्टि कर दी। इसके बाद पुलिस ने इसे हत्या का मामला मानते हुए केस दर्ज किया। गांव में चर्चा थी कि व्यक्ति की किसी से दुश्मनी थी, इसलिए हत्या की आशंका जताई जा रही थी। पुलिस ने कुछ संदिग्धों से पूछताछ भी की और जांच की दिशा उसी आधार पर आगे बढ़ती रही। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में सबसे बड़ी चूक यह रही कि शव की वैज्ञानिक और पुख्ता पहचान नहीं हो पाई। यही चूक बाद में इस रहस्यमय मामले का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुई।
दो महीने बाद जिंदा लौटा ‘मरा हुआ’ शख्स
करीब दो महीने बाद गांव में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब वही व्यक्ति, जिसे मरा हुआ मानकर दफना दिया गया था, अचानक अपने घर के दरवाजे पर खड़ा नजर आया। परिवार वालों को अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हुआ। मां रोते-रोते बेहोश हो गई, पिता सन्न रह गए और आसपास के लोग डर और हैरानी में उसे देखने लगे। पहले तो कुछ लोगों को लगा कि यह कोई भूत-प्रेत या भ्रम है, लेकिन जब उसने अपनी पहचान बताई और पुरानी बातें साझा कीं, तब सबको यकीन हुआ कि वह सच में जिंदा है। व्यक्ति ने बताया कि वह किसी निजी कारण से गांव छोड़कर बाहर चला गया था और उसे इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि उसे मरा हुआ मान लिया गया है। जब उसे अपने ही ‘मर्डर’ और अंतिम संस्कार की खबर मिली, तो वह खुद हैरान रह गया और तुरंत घर लौट आया। उसकी हालत पूरी तरह स्वस्थ बताई जा रही है।
मरा हुआ मानकर दर्ज हुआ केस
इस घटना के सामने आने के बाद पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिस व्यक्ति को मरा हुआ मानकर केस दर्ज हुआ, उसकी पहचान कैसे गलत हो गई? बिना पुख्ता जांच और वैज्ञानिक पुष्टि के अंतिम संस्कार कैसे होने दिया गया? अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस अज्ञात शव को दफनाया गया, वह आखिर था कौन? पुलिस अब इस मामले की दोबारा जांच कर रही है और पूरे केस को नए सिरे से खोल दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह एक गंभीर लापरवाही का मामला है और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाएगी। वहीं गांव और आसपास के इलाके में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग इसे चमत्कार कह रहे हैं तो कुछ इसे सिस्टम की सबसे बड़ी नाकामी बता रहे हैं। फिलहाल, ‘जिंदा लौटे मृतक’ की कहानी ने जशपुर ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी है।
