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1700 किलोमीटर की तपस्या पूरी… अब बस कुछ ही दिन! तमिलनाडु से चला विशाल शिवलिंग सिवनी पहुंचा, इस मंदिर में होगा ऐतिहासिक प्रतिष्ठापन

विराट रामायण मंदिर में स्थापना के लिए तमिलनाडु के महाबलीपुरम से रवाना हुआ 33 फीट ऊंचा विशाल शिवलिंग करीब 1700 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर मध्य प्रदेश के सिवनी पहुंच चुका है। जानिए आस्था की इस महायात्रा की पूरी कहानी, तकनीकी चुनौतियां और आगे की तैयारियां।

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तमिलनाडु के महाबलीपुरम से शुरू हुई आस्था की यह महायात्रा अब अपने अहम पड़ाव तक पहुंच चुकी है। विराट रामायण मंदिर में स्थापित किए जाने वाले विशाल शिवलिंग ने लगभग 1700 किलोमीटर की लंबी दूरी तय कर ली है और अंतिम समाचार मिलने तक यह काफिला मध्य प्रदेश के सिवनी पहुंच चुका है। रास्ते भर यह यात्रा केवल एक धार्मिक परिवहन नहीं रही, बल्कि श्रद्धा, उत्साह और आस्था का चलायमान उत्सव बन गई। जहां-जहां से यह शिवलिंग गुजरा, वहां स्थानीय लोगों ने पुष्पवर्षा, आरती और भजन-कीर्तन के साथ इसका स्वागत किया। कई स्थानों पर लोगों ने सड़क किनारे खड़े होकर दर्शन किए और इस पल को अपने मोबाइल कैमरों में कैद किया। आयोजकों के अनुसार, यह यात्रा देश के अलग-अलग हिस्सों में धार्मिक एकता और सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक बनकर उभरी है।

33 फीट ऊंचा, 210 टन वजनी शिवलिंग और तकनीक की बड़ी परीक्षा

इस महायात्रा का केंद्र बिंदु है 33 फीट ऊंचा और करीब 210 मीट्रिक टन वजनी विशाल शिवलिंग, जिसे एक ही ग्रेनाइट पत्थर से तराशा गया है। इसे लाने के लिए 110 पहियों वाले विशेष भारी वाहन का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो अपने आप में एक इंजीनियरिंग चमत्कार माना जा रहा है। इस वाहन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि सड़क, पुल और मोड़ों पर वजन का संतुलन बना रहे। यात्रा के दौरान कई राज्यों की सीमाओं पर प्रशासन को विशेष इंतजाम करने पड़े, कहीं बिजली की लाइनों को अस्थायी रूप से हटाया गया तो कहीं यातायात को घंटों तक नियंत्रित किया गया। विशेषज्ञों के मुताबिक, इतनी भारी और विशाल धार्मिक प्रतिमा को इतनी लंबी दूरी तक सुरक्षित पहुंचाना बेहद चुनौतीपूर्ण काम है, लेकिन अब तक यह यात्रा बिना किसी बड़ी बाधा के आगे बढ़ती रही है।

दस साल की साधना, तीन करोड़ की लागत और शिल्पकला की मिसाल

इस शिवलिंग के निर्माण में लगभग दस वर्षों का समय लगा है। प्रसिद्ध शिल्पकार लोकनाथ और उनकी टीम ने एक ही विशाल ग्रेनाइट पत्थर को तराश कर इसे आकार दिया। करीब तीन करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह शिवलिंग न केवल आकार में भव्य है, बल्कि इसकी शिल्पकला भी अत्यंत सूक्ष्म और संतुलित मानी जा रही है। कारीगरों ने इसमें पारंपरिक शैव प्रतीकों और संतुलित अनुपात का विशेष ध्यान रखा है। बताया जाता है कि पत्थर के चयन से लेकर अंतिम पॉलिश तक हर चरण में धार्मिक विधियों और तकनीकी जांच का पालन किया गया। यही कारण है कि यह शिवलिंग अब देशभर में चर्चा का विषय बन गया है और इसे आधुनिक युग की धार्मिक शिल्पकला का अद्भुत उदाहरण माना जा रहा है।

जनवरी में प्रतिष्ठा की तैयारी

आयोजकों को उम्मीद है कि जनवरी के पहले सप्ताह तक यह विशाल शिवलिंग अपने अंतिम गंतव्य विराट रामायण मंदिर परिसर में पहुंच जाएगा। इस बीच, महावीर मंदिर पटना की एक विशेष टीम को जल्द ही रवाना किया जाएगा, जो काफिले के साथ चलते हुए धार्मिक अनुष्ठानों और व्यवस्थाओं की निगरानी करेगी। मंदिर परिसर में शिवलिंग की स्थापना को लेकर व्यापक तैयारियां की जा रही हैं, जिनमें विशेष आधार निर्माण, सुरक्षा व्यवस्था और भव्य प्राण-प्रतिष्ठा समारोह की योजना शामिल है। माना जा रहा है कि प्रतिष्ठापन के समय देशभर से संत-महात्मा, श्रद्धालु और गणमान्य लोग शामिल होंगे। यह आयोजन न केवल विराट रामायण मंदिर के लिए, बल्कि समूचे धार्मिक परिदृश्य में एक ऐतिहासिक क्षण के रूप में दर्ज होने जा रहा है।

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