प्रधानमंत्री मातृत्व योजना (PMMVY) में हुए बड़े वित्तीय घोटाले ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गरीब और गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहारा देने के उद्देश्य से चलाई जा रही इस महत्वाकांक्षी योजना में भ्रष्ट तत्वों ने सेंधमारी कर दी। शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि करीब 96 लाख रुपये की राशि 1000 से अधिक फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी गई। यह मामला तब उजागर हुआ जब बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग ने योजना से जुड़े भुगतान रिकॉर्ड और लाभार्थियों की सूची का मिलान शुरू किया। आंकड़ों में भारी गड़बड़ी मिलने पर विभागीय अधिकारियों को संदेह हुआ, जिसके बाद आंतरिक ऑडिट कराई गई। इस ऑडिट में सामने आया कि कई ऐसे नाम सूची में दर्ज थे, जिनका जमीनी स्तर पर कोई अस्तित्व ही नहीं था। यही नहीं, जिन खातों में पैसे भेजे गए, वे या तो निष्क्रिय थे या एक ही मोबाइल नंबर और पते से जुड़े हुए पाए गए।
फर्जी लाभार्थी और बैंक खातों का जाल
जांच में यह भी सामने आया कि फर्जीवाड़ा बेहद सुनियोजित तरीके से किया गया। बड़ी संख्या में ऐसे बैंक खाते खोले गए, जिनमें एक जैसे दस्तावेज, समान पते और कभी-कभी एक ही फोटो का इस्तेमाल किया गया। इन खातों को योजना के लाभार्थियों के रूप में दर्ज कर सीधे सरकारी धन ट्रांसफर कर दिया गया। ICDS विभाग की टीम जब लाभार्थियों के पते पर पहुंची तो कई जगह या तो घर बंद मिले या फिर वहां रहने वाले लोगों ने ऐसे किसी नाम की महिला के बारे में जानकारी होने से इनकार कर दिया। इससे साफ हो गया कि योजना का लाभ असली जरूरतमंद महिलाओं तक पहुंचने के बजाय फर्जी लोगों के हाथों में चला गया। अधिकारियों को आशंका है कि इस पूरे नेटवर्क में कुछ स्थानीय स्तर के कर्मचारी, डेटा एंट्री ऑपरेटर और बाहरी लोग शामिल हो सकते हैं, जिन्होंने मिलकर सरकारी सिस्टम का दुरुपयोग किया।
किस स्तर तक फैला है भ्रष्टाचार, जांच के घेरे में अधिकारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने उच्च-स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। अब यह जांच केवल पैसों की रिकवरी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि इस घोटाले में किस-किस की भूमिका रही। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है, क्योंकि बिना सत्यापन के इतनी बड़ी राशि का ट्रांसफर होना सिस्टम की बड़ी चूक को दर्शाता है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि फर्जी खातों में पैसा डालने से पहले किस स्तर पर मंजूरी दी गई और किसने आंखें मूंद लीं। यदि दोषी पाए गए लोगों पर कार्रवाई होती है, तो निलंबन से लेकर आपराधिक मुकदमे तक की संभावना जताई जा रही है। साथ ही बैंकिंग चैनल के माध्यम से यह भी जांच की जा रही है कि पैसा निकालकर आखिर कहां और किसके पास पहुंचा।
योजना की साख पर सवाल और आगे की राह
प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है, लेकिन इस तरह के घोटाले योजना की साख को नुकसान पहुंचाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते इस मामले में कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में ऐसे और भी मामले सामने आ सकते हैं। सरकार की ओर से संकेत दिए गए हैं कि आगे से लाभार्थियों के सत्यापन की प्रक्रिया और सख्त की जाएगी, जिसमें आधार, बैंक खाते और फील्ड स्तर पर भौतिक सत्यापन को अनिवार्य बनाया जा सकता है। इसके साथ ही डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम को मजबूत करने पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी को शुरुआती स्तर पर ही पकड़ा जा सके। फिलहाल पूरा मामला जांच के अधीन है, लेकिन इतना साफ है कि यह घोटाला सिर्फ पैसों का नहीं, बल्कि भरोसे का भी है, जिसे बहाल करने के लिए प्रशासन को ठोस कदम उठाने होंगे।
Read more-मनरेगा की जगह ‘जी राम जी’? मोदी सरकार की नई योजना से बदलेगा ग्रामीण रोजगार का खेल
