उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में स्थित ऐतिहासिक कालिंजर दुर्ग को पर्यटन के मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। बबेरू विधानसभा से समाजवादी पार्टी के विधायक विशंभर सिंह यादव ने कालिंजर क्षेत्र में अपनी 5 बीघा निजी भूमि प्रशासन को दान कर दी है। यह भूमि कालिंजर आने वाले पर्यटकों और स्थानीय यात्रियों की सुविधा के लिए रोडवेज बस स्टैंड के निर्माण में उपयोग की जाएगी। विधायक की इस पहल को जनहित से जुड़ा बड़ा और सराहनीय निर्णय माना जा रहा है। लंबे समय से कालिंजर दुर्ग तक पहुंचने के लिए परिवहन सुविधाओं की कमी महसूस की जा रही थी, जिसे देखते हुए यह भूमि दान भविष्य में क्षेत्र के विकास की नींव साबित हो सकता है।
जिलाधिकारी की पहल और प्रशासन की योजना
जिलाधिकारी जे. रीभा द्वारा कालिंजर दुर्ग को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के लिए व्यापक योजना बनाई जा रही है। इसी क्रम में प्रशासन ने दुर्ग के आसपास आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दिया है। रोड, पार्किंग, बस स्टैंड और अन्य जनसुविधाओं के लिए भूमि की आवश्यकता थी, जिसके लिए संबंधित अधिकारियों को भूमि क्रय के निर्देश दिए गए थे। ऐसे समय में विधायक विशंभर सिंह यादव द्वारा भूमि दान को प्रशासनिक प्रयासों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। यह दान उसी मुहिम का हिस्सा है, जिसके तहत कालिंजर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए अधिक सुलभ और आकर्षक बनाया जाना है।
कानूनी प्रक्रिया और पारिवारिक सहभागिता
भूमि दान की पूरी कानूनी प्रक्रिया विधिवत रूप से संपन्न की गई। रजिस्ट्री दान पत्र की कार्यवाही विधायक विशंभर सिंह यादव के पुत्र वरुण यादव, बहू पूनम यादव, सौम्या यादव और पौत्र शौर्य प्रताप सिंह की उपस्थिति में पूरी हुई। इस अवसर पर प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। परिवार के सभी सदस्यों की सहमति से भूमि दान किया जाना इस बात को दर्शाता है कि यह निर्णय केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की भावना से प्रेरित है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस कदम से क्षेत्र में विकास कार्यों को गति मिलेगी और आने वाले समय में रोजगार व पर्यटन से जुड़ी नई संभावनाएं भी पैदा होंगी।
क्या बोले विधायक विशंभर सिंह यादव
इस अवसर पर विधायक विशंभर सिंह यादव ने कहा कि कालिंजर दुर्ग बुंदेलखंड की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान है। उन्होंने बताया कि पहले चित्रकूट भी इसी जनपद का हिस्सा था, लेकिन जिले के विभाजन के बाद अब बांदा में कालिंजर दुर्ग ही एकमात्र प्रमुख ऐतिहासिक धरोहर के रूप में बचा है। ऐसे में इसका संरक्षण और विकास अत्यंत जरूरी है। विधायक ने यह भी कहा कि यदि जनप्रतिनिधि और प्रशासन मिलकर काम करें, तो कालिंजर दुर्ग को वैश्विक पहचान दिलाई जा सकती है। उनका मानना है कि बेहतर सुविधाओं के साथ कालिंजर न केवल पर्यटन स्थल के रूप में उभरेगा, बल्कि बुंदेलखंड की संस्कृति और इतिहास को भी नई पीढ़ी तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगा।
