Wednesday, February 4, 2026
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‘काश ये काम पूरा हो जाता…’ धर्मेंद्र का अधूरा सपना याद करते ही फूट-फूटकर रोईं हेमा मालिनी

हेमा मालिनी ने दिल्ली में धर्मेंद्र की शोक सभा के दौरान उनके अधूरे सपनों और न पूरे हो पाए कामों का उल्लेख करते हुए भावुक बयान दिया।

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दिल्ली के डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में 11 दिसंबर को आयोजित धर्मेंद्र की शोक सभा उनके चाहने वालों के लिए बेहद भावुक पल लेकर आई। तहदिल से अपना दर्द साझा करते हुए हेमा मालिनी ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें अपने धरम जी के लिए इस तरह की सभा आयोजित करनी पड़ेगी। जैसे ही उन्होंने मंच पर बोलना शुरू किया, उनकी आवाज कांपने लगी और आंखें भर आईं। वहां मौजूद हर शख्स इस दृश्य को देखकर भावुक हो उठा। बेटियां ईशा और आहना उनकी बगल में खड़ी रहीं और हर पल उन्हें संभालने की कोशिश करती रहीं।

राजनीतिक और फिल्म जगत की बड़ी हस्तियां हुईं शामिल

धर्मेंद्र को अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए राजनीति और सिनेमा जगत कई बड़ी हस्तियां इस शोक सभा में शामिल हुईं। गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, किरण रिजिजू, अनुराग ठाकुर और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता मौजूद रहे। फिल्म इंडस्ट्री से कंगना रनौत और रामायण फेम अरुण गोविल ने भी आकर दिवंगत अभिनेता को सम्मान दिया। पूरा माहौल शांत, सम्मानपूर्ण और भावनाओं से भरा हुआ था, जहां हर कोई धर्मेंद्र की यादों में खोया था।

 

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हेमा मालिनी ने सुनाया धर्मेंद्र का ‘अधूरा सपना’

अपने संबोधन में हेमा मालिनी ने धर्मेंद्र की उस अधूरी इच्छा के बारे में बताया जिसे वह पूरा करने की योजना बना रहे थे। उन्होंने कहा कि धरम जी का एक बड़ा सपना अपनी शायरी और कविताओं की किताब प्रकाशित करना था। उम्र के आखिरी पड़ाव में उन्होंने उर्दू शायरी में एक नया अंदाज़ और नई गहराई विकसित की थी। उनके पास हर परिस्थिति के लिए एक शेर तैयार रहता था, और यही उनकी अनोखी पहचान थी। हेमा ने कहा कि वह इस किताब को लेकर बेहद उत्साहित थे और इसका काफी हिस्सा तैयार कर चुके थे, लेकिन किस्मत ने उन्हें पूरा करने का मौका नहीं दिया।

यादों में हमेशा जिंदा रहेंगे ‘धरम जी’

हेमा मालिनी ने आगे कहा कि धर्मेंद्र केवल एक महान अभिनेता ही नहीं थे, बल्कि एक संवेदनशील इंसान भी थे। परिवार, रिश्ते और शब्दों से उनका लगाव किसी भी इंसान को उनसे जोड़ देता था। उन्होंने बताया कि धरम जी अपने करीबियों के लिए हमेशा कुछ ना कुछ सोचते रहते थे और परिवार को खुश देखना ही उनका सबसे बड़ा सुख था। शोक सभा के दौरान हेमा ने यह भी कहा कि भले ही वो अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी बातें, किस्से और उनकी रचनाएं उन्हें हमेशा के लिए हमारे दिलों में जिंदा रखेंगी।

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