महिलाओं पर विवादित और अभद्र टिप्पणी करने के बाद कथावाचक अनिरुद्धाचार्य की परेशानी अब और बढ़ गई है। उनकी यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई, जिसके बाद कई संगठनों और महिलाओं ने इसका विरोध किया।
अब मामला कानूनी मोड़ ले चुका है, क्योंकि उनके खिलाफ दर्ज याचिका को आगरा कोर्ट ने सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। इससे यह साफ हो गया है कि यह विवाद अब केवल नाराजगी तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके खिलाफ कानून के दायरे में गंभीर कार्रवाई की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं।
मीरा राठौर ने दायर की याचिका
अखिल भारत हिंदू महासभा आगरा की जिलाध्यक्ष मीरा राठौर द्वारा इस मामले में कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। मीरा राठौर का कहना है कि महिलाओं के सम्मान से खिलवाड़ किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
उनका आरोप है कि अनिरुद्धाचार्य की टिप्पणी महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली है और समाज में गलत संदेश देती है। कोर्ट द्वारा याचिका स्वीकार किए जाने के बाद उन्होंने कहा कि यह फैसला महिलाओं के सम्मान की दिशा में बड़ा कदम है।
मीरा राठौर का यह भी कहना है कि कथावाचक जैसे लोग, जिनकी लाखों की फॉलोइंग होती है, अगर ऐसी भाषा का इस्तेमाल करते हैं तो समाज पर इसका नकारात्मक असर पड़ना तय है।
कोर्ट की मंजूरी से बढ़ी कानूनी कार्रवाई की संभावना
याचिका को स्वीकार किए जाने के बाद अब इस मामले में आगे की सुनवाई होगी, जिसमें यह तय होगा कि अनिरुद्धाचार्य पर किस प्रकार की कानूनी कार्रवाई या जांच की जा सकती है।
कानूनी विशेषज्ञों की मानें तो महिलाओं पर अपमानजनक टिप्पणी करना भारतीय कानून के तहत दंडनीय अपराध है, और अगर कोर्ट इसे गंभीर मानता है तो आरोपी के खिलाफ FIR, गिरफ्तारी या जुर्माने जैसी कार्रवाई भी संभव है।
इसके साथ ही, यह मामला उन धार्मिक या आध्यात्मिक व्यक्तियों पर भी सवाल खड़ा करता है जो अपने मंच से समाज को संदेश देते हैं, लेकिन कभी-कभी विवादित बयान देकर खुद कानूनी पचड़ों में फंस जाते हैं।
समाज में बढ़ी प्रतिक्रिया; विरोध का दायरा फैला
अनिरुद्धाचार्य की टिप्पणी को लेकर समाज में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। जहां कई लोग उनके समर्थन में दिख रहे हैं, वहीं बड़ी संख्या में लोग उनकी टिप्पणी को महिलाओं के सम्मान के खिलाफ बता रहे हैं।
महिला संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कई युवाओं ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाते हुए मांग की है कि ऐसे बयानों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि धार्मिक या सार्वजनिक व्यक्तियों को अपनी भाषा और जिम्मेदारियों को लेकर और ज्यादा सतर्क होना होगा। कोर्ट में मामला बढ़ने के बाद अब यह देखना होगा कि आगे की सुनवाई में क्या दिशा मिलती है और अनिरुद्धाचार्य को किन कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
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