Tuesday, March 10, 2026
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निर्देश के बाद सड़कों पर उतरी पुलिस, दस्तावेज़ों की शुरू हुई थ्री-लेयर जांच

लखनऊ में अवैध घुसपैठियों पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई शुरू। सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर दस्तावेज़ों की थ्री-लेयर जांच, संदिग्धों पर शिकंजा कसने की तैयारी।

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उत्तर प्रदेश में अवैध घुसपैठियों के खिलाफ सरकार अब पूरी तरह एक्शन मोड में दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में सभी जिलों को स्पष्ट आदेश दिया था कि जिन लोगों के दस्तावेज़ संदिग्ध हैं या जो बिना वैध पहचान के प्रदेश में रह रहे हैं, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। इसके बाद राजधानी लखनऊ में पुलिस ने सोमवार की सुबह से ही बड़े स्तर पर विशेष अभियान छेड़ दिया।

शहर के कई इलाकों में टीमों की तैनाती की गई और उन स्थानों को खास तौर पर निशाने पर लिया गया, जहां बाहरी राज्यों और देशों से आए लोगों के रहने की सूचना अक्सर मिलती रहती है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ऐसे लोगों की पहचान करना है जो फर्जी पहचान पत्रों की मदद से यूपी में रह रहे हैं।

पुलिस ने कई ठिकानों पर मारा छापा

सोमवार को पुलिस का फोकस लखनऊ के सरोजिनी नगर क्षेत्र पर रहा, जहाँ बड़ी संख्या में कूड़ा बीनने का काम करने वाले लोग रहते हैं। कई दिनों से पुलिस को इस क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिल रही थी। टीम ने अचानक कई बस्तियों में पहुंचकर लोगों से उनके पहचान पत्र मांगे और उनकी गहन जांच की।

इस दौरान जब पुलिस ने कूड़ा बीनने वाले कई व्यक्तियों के आधार कार्ड चेक किए तो चौंकाने वाली बात सामने आई। अधिकतर लोगों के आधार कार्ड उत्तर प्रदेश के नहीं, बल्कि असम के बने हुए मिले। इससे पुलिस को शक हुआ कि कहीं ये लोग गलत पहचान का इस्तेमाल कर प्रदेश में अवैध रूप से तो नहीं रह रहे। इस जानकारी के सामने आते ही पुलिस अधिकारियों ने जांच और सख्त करने का फैसला किया।

शुरू हुई दस्तावेज़ों की थ्री-लेयर वेरिफिकेशन प्रक्रिया

पुलिस अब इन व्यक्तियों के आधार और अन्य दस्तावेज़ों की थ्री-लेयर जांच कर रही है। इस प्रक्रिया में पहला चरण है दस्तावेज़ों की भौतिक जांच—यानी आधार कार्ड असली है या नकली, उसकी गुणवत्ता, प्रिंट और क्यूआर कोड की सत्यता।

दूसरा चरण है ऑनलाइन वेरिफिकेशन, जिसके तहत UIDAI की व्यवस्था के जरिए यह पता लगाया जा रहा है कि जिस नाम और पते पर आधार जारी हुआ है, वह वास्तविक है या नहीं। तीसरा चरण सबसे महत्वपूर्ण है–स्थानीय और स्थायी पते की क्रॉस वेरिफिकेशन। यानी दस्तावेज़ कहां से जारी हुआ और धरातल पर वह व्यक्ति वास्तव में उस पते से संबंधित है या नहीं।
अगर किसी भी चरण में दस्तावेज़ संदिग्ध पाया गया, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और उसे प्रदेश से बाहर भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

अभियान से फैली हलचल

जैसे ही पुलिस की कार्रवाई की जानकारी आसपास के इलाकों में फैली, कई बस्तियों में हलचल देखी गई। कुछ लोग मौके से गायब हो गए, जिसके बाद पुलिस ने और टीमों को तैनात कर दिया है ताकि कोई संदिग्ध व्यक्ति क्षेत्र छोड़कर भाग न सके।

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि अगर समय रहते ऐसी जांच नहीं की गई, तो कुछ लोग फर्जी पहचान के सहारे आपराधिक गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं, जिससे प्रदेश की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। इसी कारण सरकार इस अभियान को बड़े स्तर पर चलाने की तैयारी में है।
अधिकारी यह भी कह रहे हैं कि आने वाले दिनों में लखनऊ ही नहीं, बल्कि पूरे यूपी में ऐसे अभियान तेज किए जाएंगे, ताकि अवैध घुसपैठियों और फर्जी दस्तावेज़ रखने वालों पर पूरी तरह नकेल कसी जा सके। इस कार्रवाई से क्षेत्र में रहने वाले सामान्य नागरिकों में सुरक्षा की भावना भी मजबूत हुई है।

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