कर्नाटक में पिछले कुछ महीनों से मुख्यमंत्री पद को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। कांग्रेस पार्टी के अंदर यह विवाद तब शुरू हुआ जब 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद तय हुआ कि मुख्यमंत्री पद दो साल तक सिद्धारमैया संभालेंगे और फिर दूसरे नेता को मौका मिलेगा।
हालांकि, इस रोटेशन की योजना पर अब सवाल उठने लगे हैं। डीके शिवकुमार और उनके समर्थक समय से पहले ही सत्ता की मांग कर रहे हैं, जबकि सिद्धारमैया ने कहा कि वह पार्टी के फैसले का इंतजार करेंगे। इस कारण दोनों नेताओं के बीच अंदरूनी मतभेद मीडिया में भी दिखाई देने लगे।
ब्रेकफास्ट मीटिंग: दोनों नेताओं की मुलाकात
आज सुबह (29 नवंबर) उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के सरकारी आवास पहुंचे। यह मुलाकात नाश्ते के दौरान हुई, इसलिए इसे “ब्रेकफास्ट मीटिंग” कहा जा रहा है।
मुलाकात का मुख्य उद्देश्य दोनों नेताओं के बीच संवाद कायम करना और पार्टी के भीतर तनाव को कम करना बताया जा रहा है। चर्चा में सत्ता हस्तांतरण की योजना, भविष्य की रणनीति और सरकार की स्थिरता बनाए रखने के उपाय शामिल रहे।
मीटिंग से क्या संकेत मिले?
सिद्धारमैया ने बैठक के दौरान कहा कि वह वही कदम उठाएंगे, जिसकी पार्टी उनसे अपेक्षा करेगी। वहीं डीके शिवकुमार ने भी कहा कि वे पार्टी के फैसले का सम्मान करेंगे और जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक असल में पार्टी हाई‑कमांड के निर्देश पर हुई थी। इसका मकसद दोनों गुटों को एक मंच पर लाना और सरकार की स्थिरता सुनिश्चित करना है। हालांकि आलोचक इसे केवल “दिखावटी शांति” बता रहे हैं।
अगले कदम और भविष्य
ब्रेकफास्ट मीटिंग के बाद डीके शिवकुमार दिल्ली के लिए रवाना होंगे, जहां वे पार्टी के शीर्ष नेताओं से मुलाकात करेंगे। वहीं कर्नाटक विधानसभा का अगला सत्र दिसंबर के पहले हफ्ते में शुरू होने वाला है।
पार्टी हाई‑कमांड का फैसला आने तक मुख्यमंत्री पद पर कौन रहेगा और सत्ता हस्तांतरण कब होगा, यह स्पष्ट नहीं है। फिलहाल यह बैठक एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन राजनीतिक अस्थिरता पूरी तरह खत्म होने में समय लग सकता है।
