Monday, February 2, 2026
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उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफे के बाद पहली बार जगदीश धनखड़ की मंच पर वापसी, बोले ‘मैं अपना उदाहरण नहीं दे रहा…’

पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ इस्तीफे के बाद पहली बार सार्वजनिक मंच पर नजर आए। स्वास्थ्य कारणों से पद छोड़ने के बाद उनके इस बयान ने कई सियासी सवाल खड़े कर दिए। जानिए पूरा मामला विस्तार से।

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उपराष्ट्रपति पद से अचानक इस्तीफा देकर देश की राजनीति में हलचल मचाने वाले जगदीप धनखड़ एक बार फिर सार्वजनिक मंच पर नजर आए, लेकिन उनके चेहरे पर अब भी वही चुप्पी और सस्पेंस साफ झलक रहा था। कार्यक्रम में पहुंचते ही कैमरों की भीड़ उन्हें घेरे रही, क्योंकि 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर दिए गए इस्तीफे के बाद यह उनका पहला बड़ा सार्वजनिक संबोधन था। मंच से बोलते समय उन्होंने जो पहला वाक्य कहा— “मैं अपना उदाहरण नहीं दे रहा हूं”— उसने माहौल में मौजूद सियासी तापमान को और बढ़ा दिया। धनखड़ ने भले ही अपने इस्तीफे को व्यक्तिगत वजहों से जुड़ा बताया हो, लेकिन उनकी इस वापसी ने यह सवाल फिर जीवित कर दिया कि क्या कहानी सिर्फ इतनी ही थी जितनी सामने कही गई या फिर कुछ और परतें अभी भी खोलनी बाकी हैं?

“धनखड़ बोले— मैं उदाहरण नहीं, अनुभव साझा कर रहा हूं”

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों के बीच जैसे ही जगदीश धनखड़ ने बोलना शुरू किया, सभी की नजरें उनके शब्दों में छिपे संकेत तलाशने लगीं। उन्होंने कहा कि वह अपना उदाहरण नहीं दे रहे हैं, बल्कि उन अनुभवों को साझा कर रहे हैं जिन्हें उन्होंने अपने कार्यकाल में करीब से महसूस किया। यह वाक्य अपने आप में ही कई तरह की संभावनाओं के लिए दरवाज़ा खोलता दिखा। इस्तीफे के बाद जगदीश धनखड़ केवल एक बार— केरल के नए राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन के शपथ ग्रहण समारोह में— दिखाई दिए थे, लेकिन उससे आगे वह लगातार सार्वजनिक मंचों से दूर रहे। इस अचानक चुप्पी से राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज थीं कि क्या स्वास्थ्य कारण ही असल वजह है या फिर पर्दे के पीछे कोई और खींचतान जारी थी। कार्यक्रम के दौरान भी वह अपने इस्तीफे पर सीधे कुछ न कहते हुए सिर्फ इशारों में बातें करके लोगों की जिज्ञासा और बढ़ा गए।

“सियासी गलियारों में नए सवाल— आगे क्या करेंगे धनखड़?”

धनखड़ के इस नए सार्वजनिक उपस्थित होने से राजनीतिक हलके में चर्चाओं का दौर फिर तेज हो गया है। एक ओर जगदीश धनखड़ के समर्थक मानते हैं कि वह पूरी तरह स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं और जल्द ही किसी नई भूमिका में दिखाई दे सकते हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या इस्तीफा वास्तव में अचानक लिया गया फैसला था, या फिर लंबे समय से चल रही किसी खामोश असहमति का परिणाम? मंच से दिए गए उनके बयान में जहां शब्द कम थे, वहीं संकेत ज्यादा थे— यही वजह है कि सियासी पंडित अब उनकी अगली चाल पर पैनी नजर रखे हुए हैं। मंच से उतरते समय भी जगदीश धनखड़ ने सिर्फ हाथ जोड़कर मुस्कुराहट दी, लेकिन कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया। अब उनकी यह चुप्पी आगे आने वाले दिनों की सबसे बड़ी खबर की शुरुआत हो सकती है।

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