Monday, February 16, 2026
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काशी घाटों पर साइबेरियन मेहमानों की दस्तक, पर्यटकों की भीड़ में बढ़ा उत्साह

वाराणसी के घाटों पर नवंबर-दिसंबर में साइबेरियन पक्षियों की आहट ने पर्यटकों को किया आकर्षित। गंगा किनारे इन खूबसूरत मेहमानों का स्वागत और स्थानीय जीवन पर असर पढ़िए पूरी खबर में।

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वाराणसी के गंगा घाटों पर हर साल नवंबर-दिसंबर में एक अनोखी रौनक देखने को मिलती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, साइबेरियन पक्षी हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर काशी पहुंचते हैं और तीन से चार महीने तक घाटों पर अपना ठिकाना बनाते हैं। इस बार भी जैसे ही ये रंग-बिरंगे मेहमान पहुंचे, घाटों की चहल-पहल और बढ़ गई।

स्थानीय मछुआरे और घाट किनारे रहने वाले दुकानदार इस मौसम को खास मानते हैं। उनका कहना है कि इन पक्षियों के आगमन से न सिर्फ घाटों की सुंदरता बढ़ती है, बल्कि पर्यटकों की भीड़ में भी इजाफा होता है। खासकर सायं और सुबह के समय घाटों पर पक्षियों की गतिविधि देखने लायक होती है।

पर्यटकों का तांता बढ़ा

साइबेरियन पक्षियों की मौजूदगी ने वाराणसी के पर्यटन को भी नई ऊर्जा दी है। देश और विदेश से आए पर्यटक गंगा किनारे इन खास मेहमानों को देखने के लिए घंटों खड़े रहते हैं। स्थानीय होटलों और गेस्ट हाउसों में इस समय कमरे की बुकिंग बढ़ जाती है।

गाइड्स का कहना है कि पक्षियों की संख्या और उनकी अनोखी उड़ान देखकर पर्यटक घंटों मंत्रमुग्ध रह जाते हैं। बच्चों और फोटोग्राफरों के लिए यह समय विशेष आकर्षण का होता है। वाराणसी के घाटों की रौनक इन पक्षियों के आगमन से और भी जीवंत हो जाती है।

स्थानीय जीवन पर असर

साइबेरियन पक्षियों के आगमन से घाटों पर न केवल पर्यटन बढ़ता है बल्कि स्थानीय जीवन पर भी इसका असर पड़ता है। मछुआरे, नाविक और घाट किनारे के छोटे व्यवसायी इस मौसम को सबसे ज्यादा फायदा मानते हैं। नाविक पर्यटकों को पक्षी देखने के लिए विशेष नौकायन सेवाएं प्रदान करते हैं।
स्थानीय दुकानदार भी पक्षियों की तस्वीरों, पोस्टरों और स्मृति चिन्हों की बिक्री कर इन अद्भुत मेहमानों के आगमन का लाभ उठाते हैं। कुछ लोग तो इस अवसर पर गंगा किनारे चित्रकला और पेंटिंग वर्कशॉप भी आयोजित करते हैं।

संरक्षण की पहल और भविष्य

साइबेरियन पक्षियों के संरक्षण को लेकर वाराणसी में विभिन्न पहलें की जा रही हैं। एनजीओ और पर्यावरणविद घाटों पर सफाई, भोजन और सुरक्षित जगह उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि इन पक्षियों का सुरक्षित आगमन और प्रवास घाटों की जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण है।
स्थानीय प्रशासन भी घाटों पर जागरूकता अभियान चला रहा है ताकि पर्यटक और स्थानीय लोग पक्षियों की आदतों और आवास का सम्मान करें। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह संतुलन बना रहे, तो वाराणसी न केवल पर्यटन बल्कि प्राकृतिक सुंदरता में भी वैश्विक पहचान बना सकता है।

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